बिहार की सबसे बड़ी ताकत उसकी सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और विभिन्न धर्मों व संस्कृतियों के प्रति सम्मान है- लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड), राज्यपाल

ध्रुव कुमार सिंह, पटना, बिहार, २९ सितम्बर
पटना स्थित ऐतिहासिक खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) द्वारा किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘महात्मा गांधी और भाषा, साहित्य और संस्कृति पर उनका दृष्टिकोण’ है। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राज्यपाल ने बिहार की सामाजिक एकता और समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि बिहार की सबसे बड़ी ताकत उसकी सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और विभिन्न धर्मों व संस्कृतियों के प्रति सम्मान है। इस भावना को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह ताकत बिहार को विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने कहा की गांधी जी शिक्षा और जन-संवाद के लिए मातृभाषा व क्षेत्रीय भाषाओं के सबसे बड़े हिमायती थे उनका मानना था कि विदेशी भाषा में सोचना मौलिकता को खत्म करता है। उन्होंने बताया कि गांधी जी का मानना था कि साहित्य केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति (अंत्योदय) के उत्थान का माध्यम होना चाहिए। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के जाने-माने विद्वानों, शिक्षाविदों और मुख्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे। संगोष्ठी में गांधी जी के उस दृष्टिकोण पर विशेष चर्चा हुई, जिसमें वे हिंदी और उर्दू के समावेशी रूप यानी ‘हिंदुस्तानी’ को देश की संपर्क भाषा बनाना चाहते थे, ताकि देश की सांस्कृतिक भाषाई विविधता बनी रहे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मैथिलीशरण गुप्त, प्रेमचंद और दिनकर जैसे महान लेखकों की कृतियों पर गांधी जी के विचारों का जो गहरा प्रभाव पड़ा, उस साहित्यिक चेतना को आज की युवा पीढ़ी तक पहुँचाने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने गांधी जी के ‘हिंद स्वराज’ के सिद्धांतों को उद्धृत करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति किसी एक संप्रदाय या वर्ग की नहीं, बल्कि विविधता में एकता को संजोने वाली है। बदलते वैश्विक दौर में पारंपरिक भारतीय मूल्यों, नैतिक कानूनी प्रथाओं और गांधीवादी नैतिकता के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को अपनाने पर गंभीर विमर्श हुआ। खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी में शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कई प्रमुख हस्तियां, शिक्षाविद और गांधीवादी विचारक शामिल हो रहे हैं. इस संगोष्ठी में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के विद्वान, शोधकर्ता और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिनमें रामपुर रज़ा लाइब्रेरी एवं संग्रहालय, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, नव नालंदा महाविहार, नालंदा, हैदराबाद विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना, राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (IGNCA), नई दिल्ली शामिल हैं. इसके अलावा पटना के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिंदी, उर्दू और इतिहास विभागों के प्रोफेसर, शोधार्थी तथा साहित्य प्रेमी भी इस चर्चा का हिस्सा बने हैं।





