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बाबा साहेब जाति विभेद को समाज और राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ा बाधक मानते थे- डॉ.संतन राम

ध्रुव कुमार सिंह, दरभंगा, बिहार, २० अप्रैल

डॉ.भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर, इग्नू क्षेत्रीय केंद्र, दरभंगा ने “डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन और योगदान” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया. इग्नू (IGNOU) क्षेत्रीय केंद्र, दरभंगा द्वारा आयोजित यह चर्चा बाबा साहेब के आदर्शों को याद करने का एक सार्थक प्रयास रही। इस कार्यक्रम के दौरान उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर इग्नू क्षेत्रीय केंद्र, दरभंगा के निदेशक डॉ.संतन राम ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मानवता के लिए डॉ. अंबेडकर के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डॉ.अंबेडकर समाज के एकीकरण के लिए स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा और न्याय के सामंजस्य को अनिवार्य मानते थे। डॉ.संतन ने रेखांकित किया कि बाबा साहेब जाति विभेद को समाज और राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ा बाधक मानते थे। उनके अनुसार, विकसित राष्ट्र का सपना तभी पूरा हो सकता है जब समाज से जाति, वर्ग, लिंग और भाषा आधारित भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो जाए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सह एलएन मिथिला विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.मुनेश्वर यादव ने भारत को रूपांतरित करने वाली उस मौन क्रांति की ओर इशारा किया, जिसकी शुरुआत डॉ.अम्बेडकर नें की थी। डॉ.यादव नें बाबा साहेब के प्रसिद्ध मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” को वर्तमान संदर्भ में दोहराया गया। उन्होंने यह बात प्रमुखता से रखी कि अंधविश्वास को त्यागकर और तार्किक सोच अपनाकर ही राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है। कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन इग्नू क्षेत्रीय केंद्र, दरभंगा के निजी सचिव राजीव रंजन द्वारा किया गया।

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