जिलाधिकारी ने की संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने हेतु तैयारियों की समीक्षा, पदाधिकारियों को एसओपी के अनुसार सुदृढ़ तैयारी रखने का दिया निर्देश

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २२ जुलाई
जिलाधिकारी कुमार गौरव ने कहा है कि संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने हेतु जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है। संपूर्ण आपदा प्रबंधन तंत्र इसके लिए पूर्णतः सजग एवं तत्पर है। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार जिला स्तर पर सभी व्यवस्था की गई है। उक्त बातें जिलाधिकारी नें मुजफ्फरपुर समाहरणालय स्थित सभागार में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने अधिकारियों को निदेश देते हुए कहा कि मौसम विभाग द्वारा दी जा रही सूचनाओं, वर्षापात के आंकड़ों तथा नदियों के जल-स्तर पर लगातार नजर रखें। जिलाधिकारी ने कहा कि एसओपी के अनुसार क्षेत्रीय पदाधिकारी यथा अंचलाधिकारी, थाना प्रभारी, अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी तुरंत रिस्पॉन्ड करेंगे। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सम्पूर्ण प्रशासनिक तंत्र सजग, सक्रिय एवं तत्पर रहे। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा वर्षापात, नदियों का जल-स्तर, संसाधनों की उपलब्धता, तटबंधों की सुरक्षा, दवाओं की उपलब्धता, फसल आच्छादन, वैकल्पिक एवं आकस्मिक फसल योजना, पेयजल की उपलब्धता, राजकीय नलकूपों की क्रियाशीलता, सड़कों की स्थिति इत्यादि की एक-एक कर वृहत समीक्षा की गई तथा संबंधित विभागों के पदाधिकारियों से अद्यतन स्थिति का जायजा लिया गया। उन्होंने कहा कि लोगों को पैनिक होने की कोई आवश्यकता नहीं है। नदियों में पानी का वत्र्तमान स्तर खतरे के निशान से कम है। जल-स्तर में परिवत्र्तन की प्रवृति भी लगभग स्थिर है। जिला में फसल आच्छादन की स्थिति भी बेहतर है। उन्होंने कहा कि बाढ़/सुखाड़ किसी भी स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा मानकों के अनुरूप सभी व्यवस्था की गई है। सभी तटबंध अपनी सभी संरचनाओं एवं स्लुईस गेटों के साथ सुरक्षित है। प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई है। लगातार निगरानी एवं चैकसी बरती जा रही है। कटाव निरोधक कार्य पूर्व में ही पूरा कर लिया गया है। संवेदनशील एवं अतिसंवदेनशील स्थानों पर बालू भरे बोरे का भंडारण किया गया है। जिलाधिकारी ने निदेश दिया कि सभी पदाधिकारी टीम भावना के साथ संवेदनशील होकर काम करें। यह सुनिश्चिित करें कि हरेक तटबंध पूर्णतः सुदृढ़ रहे। सभी सड़क मोटरेबल रहे। सिंचाई हेतु नहरों के अंतिम छोर तक जल उपलब्ध रहे। उन्होंने कहा कि बाढ़ आने की स्थिति में प्रभावितों के जान-माल की सुरक्षा एवं ससमय राहत पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जल संसाधन विभाग, पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, पीएचईडी, लघु जल संसाधन, नगर निकाय, पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग सहित संबंधित सभी विभागों के पदाधिकारी आपस में सुदृढ़ समन्वय तथा सार्थक संवाद स्थापित रखें एवं परिस्थिति के अनुसार त्वरित गति से कार्य करें। जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा की स्थिति में सामान्य जन-जीवन प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन दृढ़-संकल्पित है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को एसओपी के अनुसार मिशन मोड में काम करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान वे बाढ़ पूर्व तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का नियिमत तौर पर जायजा ले रहे हैं। किसी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों तथा जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंताओं को तटबंधों का रात्रि में निरीक्षण करने का निदेश दिया ताकि किसी भी तरह की कोई त्रुटि न रहे। उन्होंने निदेश दिया कि सतत् निगरानी एवं चैकसी बरतें। सिविल सर्जन द्वारा जानकारी दी गयी कि जिला में बाढ़ से निपटने हेतु 97 प्रकार की सभी आवश्यक दवा पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रवार मोबाईल (चलन्त) मेडिकल टीम को तैनात किया गया है। आवश्यक जीवन-रक्षक दवाओं की समुचित संख्या में उपलब्धता है। जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि पशु चिकित्सा हेतु 38 पशु राहत शिविरों को चिन्हित किया गया है। यहां आपदा की स्थिति में पशु चिकित्सकों एवं कर्मचारियों को तैनात किया गया है। पशु चिकित्सालयों में 44 प्रकार की आवश्यक दवाइयां उपलब्ध है। गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर जिला में मुख्य रूप से बूढ़ी गंडक, गंडक एवं बागमती नदियों से बाढ़ आती है। अन्य नदियों लखनदेई, कदाने, बाया नदी के कारण भी बाढ़ एवं जल-जमाव का प्रभाव रहता है। अंचल अधिकारियों एवं संबंधित कार्यपालक अभियंताओं के स्तर से जिला में विभिन्न तटबंधों के संवेदनशील एवं अतिसंवदेनशील स्थल चिन्हित किये गये हैं। बाढ़ पूर्व तैयारी के मद्देनजर संबंधित कार्यपालक अभियंताओं द्वारा तटबंधों का निरीक्षण किया गया है। मुजफ्फरपुर जिले में कुल 140 स्लुईस स्थल पर 304 गेट अवस्थित है, जो सुरक्षित है तथा वार्षिक मरम्मति एवं ग्रिसिंग की कार्रवाई पूर्ण कर ली गयी है। जिलाधिकारी ने सभी अंचल अधिकारियों एवं अनुमंडल पदाधिकारियों को बाढ़-पूर्व तैयारी के लिए आवश्यक सभी संसाधनों की उपलब्धता की नियमित तौर पर भौतिक जाँच करने का निदेश दिया गया। जिलाधिकारी ने जिला सांख्यिकी पदाधिकारी को वर्षापात के आंकड़ों पर लगातार नजर रखने तथा जिला कृषि पदाधिकारी को तदनुसार विभागीय आदेशों के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने सभी अंचल अधिकारियों एवं अनुमंडल पदाधिकारियों को चिहिन्त शरण स्थलों/राहत शिविरों तथा सामुदायिक रसोईघरों पर उपलब्ध व्यवस्थाओं का भौतिक निरीक्षण करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि एस.ओ.पी. के अनुसार हर व्यवस्था रहनी चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा कि संभावित आसन्न आपदाओं का पूर्वानुमान, ससमय एवं शीघ्र चेतावनी और आम जनता के बीच उनका प्रभावी प्रचार-प्रसार सफल आपदा प्रबंधन के मुख्य घटक हैं। प्रबंधन के विभिन्न चरणों यथा आपदा का निवारण, कमी एवं आपदा के प्रति प्रत्युत्तर के लिए सम्पूर्ण तंत्र सक्रिय है। पदाधिकारियों को बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने हेतु नदियों के जल-स्तर में वृद्धि तथा वर्षापात के आँकड़ों पर लगातार नजर रखने, तटबंधों की नियमित निगरानी करने एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने सहित सरकार द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार सभी तैयारी त्रुटिहीन ढंग से सुनिश्चित रखने का निदेश दिया गया है। जिला प्रशासन, नगर निगम, पथ निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग एवं अन्य विभागों तथा एजेंसियों के अधिकारियों को आपस में समन्वय स्थापित कर स्थिति के अनुसार त्वरित गति से रिस्पॉंड करने का निदेश दिया गया है। आम जनता से भी इन स्थितियों से बचाव हेतु ‘‘क्या करें एवं क्या न करें’’ का अनुपालन करने तथा इसे जन-जन तक प्रसारित करने का आह्वान किया गया है। किसी भी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र (0621-2212007) पर सम्पर्क किया जा सकता है। पदाधिकारियों को अतिवृष्टि की स्थिति में सामान्य जन-जीवन प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। विदित हो कि जिलाधिकारी द्वारा संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने हेतु तैयारी की नियमित समीक्षा की जा रही है। वें लगातार क्षेत्र भ्रमण भी कर रहे हैं। उन्होंने पदाधिकारियों को तटबंधों की लगातार पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने का निदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि संवेदनशील स्थलों पर तटबधों का सुदृढीकरण करें। संचार तंत्र एवं सूचना प्रणाली को सुदृढ़ रखें। शरण स्थलों पर मोबाइल मेडिकल टीम, शौचालय एवं पेयजल की समुचित व्यवस्था रहनी चाहिए। यहां मेडिकल कैंप, शिशु टीकाकरण, प्रसव, भोजन का उपस्कर, बच्चों हेतु विशेष भोजन, मच्छरदानी, सैनिटरी किट के लिए विशेष रूप से निर्मित योजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने पुल-पुलियों एवं मुख्य सड़कों विशेषकर जिला मुख्यालय से प्रखंड को जोड़ने वाले लिंक रोड की नियमानुसार मरम्मती एवं संधारण कार्य पर विशेष ध्यान देने को कहा। जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संकटग्रस्त एवं भेद्य समुदायों का प्रशिक्षण कर क्षमता वर्धन कार्य पर विशेष ध्यान देने का निदेश दिया है। जिलाधिकारी ने कहा कि सार्थक संचार तंत्र सफल आपदा प्रबंधन की रीढ़ है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को इसे सुदृढ़ एवं सक्रिय रखने का निर्देश दिया।






