बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) के मनोविज्ञान विभाग में गुरु पूर्णिमा पर मनाया गया भारतीय मनोविज्ञान दिवस (Indian Psychology Day)

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २९ जुलाई
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) के विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भारतीय मनोविज्ञान दिवस (Indian Psychology Day) के उपलक्ष्य में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध, भारतीय मनोविज्ञान तथा समकालीन विषयों पर विद्यार्थियों में वैचारिक संवाद को बढ़ावा देना था। संगोष्ठी का संयोजन प्रो.रूपाश्री जमुआर ने किया, जबकि अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रजनीश गुप्ता ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता एवं अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक प्रो.सुनील कुमार ने आमंत्रण के लिए विभाग का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “एक छात्र का आजीवन सबसे सच्चा मित्र पुस्तक होती है।” उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन की निरंतर आदत विकसित करने तथा पुस्तकों को जीवन का अभिन्न साथी बनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार भारतीय संस्कृति में ज्ञान की परंपरा सदैव गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध से समृद्ध होती रही है।उन्होंने अपने धर्म ग्रंथों को पढ़ने का सुझाव भी दिया. अपने अध्यक्षीय संबोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रजनीश गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यदि किसी संबंध को सबसे पवित्र माना गया है तो वह गुरु और शिष्य का संबंध है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन का उद्देश्य बताते हैं, व्यक्ति के भीतर छिपी संभावनाओं को जागृत करते हैं और उसके व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान, संस्कार और समर्पण की परंपरा का प्रतीक है। संगोष्ठी के दौरान छात्र-छात्राओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु पूर्णिमा तथा “योग कैसे आज Yoga बन गया” जैसे विषयों पर पावर प्वाइंट (PPT) के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं, पीजी छात्र शुभम कुमार ने संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा “दो दिन की ज़िंदगी और दो दिन का मेला…” गिटार की मधुर धुनों के साथ प्रस्तुत कर कार्यक्रम में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का सृजन किया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति को शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने खूब सराहा। डॉ.विकास कुमार ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों के शोध पत्र प्रस्तुतीकरण पर सराहना जताते हुए कहा कि शोधार्थियों और विद्यार्थियों के अधिकांश शोध भारतीय मनोविज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित थी। कार्यक्रम का संचालन डॉ.सुनीता ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ.ऋतु कुमारी द्वारा किया गया।




