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बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRA Bihar University) के कर्मचारी को अवैध शराब के साथ रंगे हाथों दबोचा गया

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २५ मई

मुजफ्फरपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRA Bihar University) से जुड़ा हुआ सामने आ रहा है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बीच इस तरह विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान के संविदा (कांटैक्ट) कर्मचारी का शराब तस्करी के नेटवर्क में शामिल होना काफी चौंकाने वाला है। आरोपी कर्मचारी को अवैध शराब की हेराफेरी या लेन-देन करते हुए मद्यनिषेध विभाग द्वारा रंगे हाथों दबोचा गया है। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि आरोपी अपनी नौकरी और पहचान की आड़ में इस अवैध धंधे को छुपाने की कोशिश कर रहा था, ताकि सुरक्षा बलों को उस पर शक न हो। बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत आरोपी पर मामला दर्ज कर उसे जेल भेजने और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। गौरतलब है की बिहार यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर या छात्रों/कर्मचारियों से जुड़ी इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी विश्वविद्यालय के हॉस्टलों से अपराधियों द्वारा कारतूसों की तस्करी करने और प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC/BPSC) की तैयारी करने वाले कुछ छात्रों द्वारा स्टडी बैग में शराब की होम डिलीवरी करने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस घटना के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों और पुलिस प्रशासन ने इसकी गहराई से तफ्तीश शुरू कर दी है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बीच एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के कर्मी का इस सिंडिकेट में शामिल होना कई बड़े सवाल खड़े करता है। आरोपी कर्मी विश्वविद्यालय के आईडी कार्ड और अपनी संविदा (Contract) नौकरी का इस्तेमाल एक सुरक्षा कवच के रूप में कर रहा था। वह इस पहचान की आड़ में बिना किसी डर या चेकिंग के शराब की खेप को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाता था। शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी यूनिवर्सिटी कैंपस और उसके आस-पास के क्षेत्रों को एक सुरक्षित ‘ड्रॉप पॉइंट’ या ‘वितरण केंद्र’ के रूप में इस्तेमाल करने की फिराक में था, ताकि पुलिस की नियमित गश्त और चेकिंग से बचा जा सके। पुलिस को अंदेशा है कि यह कर्मी केवल एक मोहरा (कूरियर) था। इसके पीछे अंतर-जिला या अंतर-राज्यीय शराब माफियाओं का हाथ है, जो बिहार के बाहर (जैसे यूपी, झारखंड या हरियाणा) से शराब मंगवाकर स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों में खपाते हैं। मद्यनिषेध विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाया गया था। आरोपी को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वह शराब की डिलीवरी देने या उसकी खेप रिसीव करने की कोशिश में था। पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन जब्त किए हैं। कॉल डिटेल्स (CDR) और व्हाट्सएप चैट्स के जरिए उन ग्राहकों और मुख्य सप्लायरों की पहचान की जा रही है, जो इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन बेहद सख्त रुख अपना रहा है। संविदा नियमों के उल्लंघन और आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता के कारण आरोपी की सेवा को तुरंत प्रभाव से समाप्त (Terminate) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस की शुरुआती मोबाइल जांच में सामने आया है कि आरोपी सीधे तौर पर ‘शराब’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करता था। वह ग्राहकों और सप्लायरों से बात करने के लिए ‘किताबें’, ‘असाइनमेंट’ या ‘फाइल’ जैसे कोडवर्ड का उपयोग करता था, ताकि किसी को शक न हो। आरोपी के जब्त फोन से कई व्हाट्सएप ग्रुप और चैट डिलीट की गई थीं, जिन्हें पुलिस साइबर सेल की मदद से रिकवर कर रही है। इसमें विश्वविद्यालय क्षेत्र के कुछ स्थानीय असामाजिक तत्वों और शहर के पॉश इलाकों के चुनिंदा ग्राहकों के नंबर मिले हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपी ने अपनी बाइक या वाहन पर विश्वविद्यालय का ‘आधिकारिक स्टिकर’ या पास लगा रखा था। बिहार में पुलिस अक्सर शैक्षणिक संस्थान या आवश्यक सेवाओं के वाहनों की सघन चेकिंग नहीं करती, जिसका फायदा उठाकर बाहरी राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश) से आने वाली विदेशी शराब को स्थानीय ठिकानों तक पहुंचाया जाता था। पकड़े गए संविदा कर्मी की भूमिका मुख्य रूप से एक ‘लोकल डिस्ट्रीब्यूटर’ या ‘कूरियर’ की थी। मुख्य डीलर उसे माल पहुंचाते थे, और वह कैंपस की भौगोलिक स्थिति (जिसमें कई सुनसान कोने और हॉस्टल के पिछले हिस्से शामिल हैं) का फायदा उठाकर डिलीवरी सुरक्षित रखता था। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कैंपस के भीतर बाहरी तत्वों के प्रवेश को रोकने और रात के समय गश्त बढ़ाने के लिए सुरक्षा ऑडिट करने पर विचार किया जा रहा है। बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी प्रशासन अब अपने यहां काम करने वाले अन्य संविदा (Contract) और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन (चरित्र प्रमाण पत्र) को दोबारा जांचने की योजना बना रहा है, ताकि कैंपस के भीतर किसी अन्य अवैध गतिविधि की संभावना को खत्म किया जा सके। बिहार सरकार और मद्यनिषेध विभाग ने इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नागरिकों से सहयोग की अपील की है। यदि आपके पास परिसर या आस-पास ऐसी किसी गतिविधि की जानकारी हो, तो आप टोल-फ्री नंबर 15545 या 1800-345-6268पर गुप्त रूप से शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जहां शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।

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