सीबीएसई द्वारा लागू किए गए त्रिभाषा सूत्र विद्यार्थियों को भाषाई, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम- रामलाल सिंह, प्रदेश सचिव, विद्या भारती

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २८ मई
विद्या भारती बिहार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 और 10 के लिए अनिवार्य किए गए त्रिभाषा सूत्र का स्वागत किया है। संगठन का मानना है कि यह नीति मातृभाषा के संरक्षण के साथ-साथ भारतीय भाषाओं की जड़ों को मजबूत करेगी और छात्रों के समग्र बौद्धिक विकास में मदद करेगी। विद्या भारती (बिहार) के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह का मत है कि यह कदम न केवल राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देगा, बल्कि विद्यार्थियों को देश की विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को करीब से समझने का अवसर भी प्रदान करेगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा लागू किए गए त्रिभाषा सूत्र का स्वागत प्रदेश सचिव श्री सिंह ने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को भाषाई, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप लागू किया गया त्रिभाषा सूत्र विद्यार्थियों को मातृभाषा, भारतीय भाषाओं तथा अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का संतुलित ज्ञान प्रदान करेगा। इससे बच्चों में अपनी संस्कृति, परंपरा एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रति सम्मान की भावना विकसित होगी। साथ ही वे वैश्विक स्तर पर संवाद और प्रतिस्पर्धा के लिए भी सक्षम बनेंगे। श्री सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी भाषा और संस्कृति में निहित होती है। मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि त्रिभाषा सूत्र विद्यार्थियों को “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना से भी जोड़ेगा तथा विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के प्रति सम्मान विकसित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीएसई की इस व्यवस्था में किसी भाषा को थोपने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। बोर्ड पहले से ही अनेक भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का विकल्प उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश सचिव श्री सिंह ने अभिभावकों, शिक्षकों एवं समाज से अपील की कि वे बच्चों को बहुभाषिक शिक्षा के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि “अधिक भाषाएं, अधिक समझ और बेहतर भविष्य” की सोच ही विकसित भारत के निर्माण का आधार बनेगी।




