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राज्य के सभी बच्चों को अच्छी और गुणवतापूर्ण शिक्षा मिले, इसे लेकर हमारी सरकार लगातार प्रयासरत है- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 'संकल्प सभागार' में शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

ध्रुव कुमार सिंह, पटना, बिहार, २३ मई

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में ‘संकल्प सभागार’ में आयोजित शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गयी. बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह एवं संजय कुमार सिंह, शिक्षा विभाग के सचिव/ अपर मुख्य सचिव (ACS) विनोद सिंह गुंजियाल, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा सज्जन राजसेकर एवं निदेशक, प्राथमिक शिक्षा विक्रम विरकर शामिल थे. बैठक में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में शिक्षा विभाग के इन सभी शीर्ष अधिकारियों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और शिक्षक भर्ती (TRE-4) के रोडमैप को लेकर गंभीर मंथन किया। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के सभी बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए की सभी विद्यालयों में शिक्षकों की समय पर और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। स्कूल भवनों, प्रयोगशालाओं और शौचालयों की स्थिति को तेजी से सुधारा जाए। छात्रों के सीखने के स्तर (लर्निंग आउटकम) को सुधारने के लिए विशेष कार्ययोजना बने। अकादमिक सत्र और परीक्षाओं का संचालन निर्धारित समय सारणी के अनुसार हो। शिक्षा विभाग के अधिकारी लगातार स्कूलों का औचक निरीक्षण और मॉनिटरिंग करें।  स्कूलों को मिलने वाले फंड और संसाधनों का पारदर्शी तरीके से उपयोग सुनिश्चित हो। राज्य में अगले 5 वर्षों में कुल 1 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. इसके तहत प्रत्येक वर्ष कम से कम 20,000 शिक्षकों की भर्ती अनिवार्य रूप से होगी. शिक्षक नियुक्तियों के लिए विज्ञापन/अधिसूचना हर साल जुलाई महीने में नियमित रूप से जारी की जाएगी. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, इस फैसले से TRE-4 (शिक्षक नियुक्ति परीक्षा का चौथा चरण) को लेकर अभ्यर्थियों का भ्रम पूरी तरह समाप्त हो गया है. खाली पदों का आकलन कर जल्द ही नया मांग पत्र भेजा जाएगा. बिहार के सभी 534 ब्लॉकों में अत्याधुनिक मॉडल स्कूल खोले जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इन मॉडल स्कूलों का उद्देश्य ऐसा माहौल बनाना है जहां मंत्रियों, अधिकारियों और गरीब बच्चों को एक साथ एक जैसी विश्वस्तरीय शिक्षा मिल सके.

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