बच्चों में बढ़ती मादक पदार्थों की लत को केवल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण बाल संरक्षण का मुद्दा माना जाना चाहिए- न्यायमूर्ति सूर्यकांत, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)

ध्रुव कुमार सिंह, पटना, बिहार, २६ सितम्बर
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पटना स्थित बिहार लोक भवनमें आयोजित ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला में ‘ड्रग्स से परे बचपनः संरक्षण, देखभाल और पुनर्समावेशन’ विषय पर अपना संबोधन दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों में बढ़ती मादक पदार्थों की लत को केवल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण बाल संरक्षण का मुद्दा माना जाना चाहिए। अपने भाषण में उन्होंने हालिया ‘लैंसेट’ रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में हर 5 में से कम से कम 1 किशोर (20%) मादक पदार्थों के सेवन के मध्यम से उच्च जोखिम में है। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आए बच्चों को समस्या या अपराधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके प्रति समाज और व्यवस्था को ‘बाल-संवेदनशील’ (Child-sensitive) रुख अपनाना होगा। बच्चों के पुनर्वास के लिए उन्होंने गोपनीयता, गरिमा, शिक्षा, आपसी विश्वास और आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखने की बात कही ताकि उन्हें कलंक-मुक्त सामान्य जीवन में वापस लाया जा सके। ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला के दौरान बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने अपने विशेष संबोधन में बच्चों में बढ़ती मादक पदार्थों की लत पर गहरी चिंता व्यक्त की। राज्यपाल ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों में नशे की समस्या को केवल एक चिकित्सीय या कानूनी दृष्टिकोण से नहीं सुलझाया जा सकता। इसके लिए बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, परिवार और उनके भविष्य को केंद्र में रखना अनिवार्य है। राज्यपाल ने इसे केवल स्वास्थ्य की समस्या मानने के बजाय बाल संरक्षण की एक बड़ी चुनौती के रूप में देखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रभावित बच्चों को समाज से अलग-थलग करने के बजाय परिवार के सुरक्षित माहौल, निरंतर परामर्श (counselling) और पुनर्वास के जरिए एक गरिमापूर्ण भविष्य दिया जाना चाहिए। इस कार्यक्रम में राज्यपाल सैयद अता हसनैन और मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, दोनों ने ही समाज, शैक्षणिक संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से एकजुट होकर ‘बाल-संवेदनशील’ (Child-sensitive) रुख अपनाने की अपील की। मुख्य न्यायाधीश ने पटना में बिहार राज्य विधि सेवा प्राधिकरण (BSLSA) परिसर में देश के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र (Victim Rights Centre) का भी उद्घाटन किया। बिहार लोक भवन में आयोजित इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में न्यायपालिका, कार्यपालिका और कानूनी क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शामिल थीं। जिनमें न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव (मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति सुधीर सिंह (न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय) पटना उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशगण, प्रत्यय अमृत (मुख्य सचिव, बिहार सरकार), दीपक कुमार सिंह (अपर मुख्य सचिव) एवं एस. डी. संजय (महाधिवक्ता – Advocate General, बिहार) मुख्य रूप से शामिल थें. इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम में कानून के छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और बाल कल्याण से जुड़े कई गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।





