पूर्वी चम्पारण के पिपराकोठी में स्थित महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-MGIFRI) ने धूमधाम से मनाया अपना 12वां स्थापना दिवस

ध्रुव कुमार सिंह, पिपराकोठी (मोतिहारी), बिहार, २१ अगस्त
पूर्वी चम्पारण के पिपराकोठी में स्थित महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-MGIFRI) ने अपना 12वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया. स्थापना दिवस समारोह में “बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि व्यवस्था” विषय पर देश के कृषि विशेषज्ञों ने गहन मंथन किया. इसमें बाढ़ और जलजमाव वाले इलाकों में किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया गया. पिपराकोठी (मोतिहारी) स्थित ICAR-Mahatma Gandhi Integrated Farming Research Institute (MGIFRI) के12वें स्थापना दिवस पर कृषि और अनुसंधान के विकास के लिए आयोजित ‘विचार-मंथन सत्र’ (Brainstorming Session) में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.दिनेश चन्द्र राय नें बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित इलाकों में फसल के साथ-साथ मछली पालन, बत्तख/बकरी पालन और बागवानी को एक साथ अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर देते हुए किसानों को फसल अवशेष न जलाने, मिट्टी की जाँच कराने, और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर कुलपति ने बाढ़ से प्रभावित होने वाले इलाकों (इकोसिस्टम) के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे कामों की तारीफ करते हुए कहा की इस तरह के विचार-मंथन सत्रों से वैज्ञानिकों और बड़े अधिकारियों को मिलकर नए उपाय खोजने में मदद मिलती है। संस्थान के निदेशक डॉ.राघवेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तर बिहार के किसानों के लिए फसल विविधीकरण (crop diversification), पशुपालन और मत्स्य पालन को मिलाकर एक मजबूत समेकित कृषि मॉडल तैयार करना उनकी प्राथमिकता है. डॉ.सिंह नें कहा की इस संस्थान की नींव 21 अगस्त 2015 को रखी गई थी और तब से यह उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खेती को टिकाऊ और मुनाफेदार बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है. इस अवसर पर किसानों और वैज्ञानिकों के काम आने वाले 6 महत्वपूर्ण कृषि प्रकाशनों (किताबों/पुस्तिकाओं) का विमोचन किया गया. खेती-किसानी में नया प्रयोग करने वाले प्रगतिशील किसानों (जैसे मत्स्य किसान यतेंद्र कश्यप), वैज्ञानिकों और स्वयं सहायता समूहों को उनके बेहतरीन काम के लिए सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ व वैज्ञानिक शामिल हुए।






