शिक्षक का काम केवल नौकरी करना नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य को आकार देना और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है- लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, राज्यपाल

ध्रुव कुमार सिंह, पटना, बिहार, १३ सितम्बर
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने पटना के बापू सभागार में राज्य के 211 नए डिग्री कॉलेजों के लिए नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों के ओरिएंटेशन प्रोग्राम (उन्मुखीकरण कार्यक्रम) को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक का काम केवल नौकरी करना नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य को आकार देना और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड समय (एक महीने के भीतर) में लगभग 2,400 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करना एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की भूमिका सिर्फ़ पढ़ाने तक ही सीमित नहीं होती, बल्कि छात्रों का भविष्य संवारने और समाज के निर्माण में योगदान देने की भी होती है। शिक्षक और छात्र का रिश्ता जीवन भर का होता है; इसलिए, शिक्षकों को हमेशा आचरण, ज्ञान और ज़िम्मेदारी के उच्च मानकों को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने नए नियुक्त शिक्षकों से आग्रह किया कि वे ग्रामीण इलाकों के नए कॉलेजों में पूरी निष्ठा के साथ काम करें और छात्रों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा दें। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज की दुनिया में शिक्षकों के लिए लगातार सीखते रहना, रिसर्च करना और टेक्नोलॉजी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ज़िम्मेदारी और नैतिकता के साथ इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी है। इस दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग और अन्य प्रशासनिक निकायों के कार्यों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ किया और नवनियुक्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए कॉलेजों में छात्रों की कम से कम 75% उपस्थिति सुनिश्चित करने का आग्रह किया। कार्यक्रम में बिहार शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) के सचिव और निदेशक, साथ ही बिहार लोक भवन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे जिन्होंने रिकॉर्ड एक महीने में 2,400 से अधिक प्राध्यापकों की इस नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।






