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हाजीपुर के नगर थाना क्षेत्र में स्थित हॉस्पिटल के निदेशक से ₹1 लाख की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने वाले अभियुक्त को पुलिस नें किया गिरफ्तार

ध्रुव कुमार सिंह, हाजीपुर (वैशाली), बिहार, ०९ जून

हाजीपुर के नगर थाना क्षेत्र में स्थित आदर्श इमरजेंसी हॉस्पिटल के निदेशक मनीष कुमार उर्फ पिंटू यादव से व्हाट्सएप के जरिए ₹1 लाख की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने वाले अभियुक्त को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है. अस्पताल संचालक को अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर रंगदारी की मांग की गई थी. तय समय पर पैसे न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी गई थी. वैशाली पुलिस कप्तान (SP) विक्रम सिहाग के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने इस केस को सुलझाया। इस सफल कार्रवाई का नेतृत्व सदर एसडीपीओ फर्स्ट (SDPO 1st) सुबोध कुमार ने किया। इस टीम में नगर थानाध्यक्ष सिकंदर कुमार और सब-इंस्पेक्टर (SI) अविनाश कुमार वर्मा शामिल थे, जिन्होंने तकनीकी सर्विलांस (Technical Investigation) के आधार पर आरोपी को ट्रैक कर गिरफ्तार किया। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तकनीकी माध्यमों (Technical Surveillance) और मोबाइल नंबर को ट्रैक कर आरोपी की पहचान की और आगे की विधिक कार्रवाई की. इस मामले में हाजीपुर के व्यापारी और चिकित्सा समुदाय में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा. सदर एसडीपीओ फर्स्ट सुबोध कुमार नें बताया की पीड़ित डॉक्टर हाजीपुर के मरई रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम के संचालक मनीष कुमार पिंटू हैं। पुलिस ने आरोपी आदित्य कुमार नामक युवक को गिरफ्तार किया है, जो मूल रूप से गोरौल थाना क्षेत्र का रहने वाला है। वह ओडिशा से परीक्षा देकर लौटा ही था कि पुलिस ने उसे दबोच लिया। अभियुक्त आदित्य कुमार ने डॉक्टर के व्हाट्सएप (WhatsApp) नंबर पर मैसेज भेजकर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की रंगदारी मांगी थी। यह धमकी भरा मैसेज 1 मई को भेजा गया था, जिसके बाद डॉक्टर ने नगर थाने में केस (प्राथमिकी) दर्ज कराया था। पूछताछ के दौरान आरोपी आदित्य कुमार ने पुलिस के सामने रंगदारी मांगने के पीछे का जो कारण बताया, वह काफी चौंकाने वाला है, आरोपी ने कुबूल किया कि उसने साल 2023 में इसी नर्सिंग होम में करीब 6 से 7 महीने तक काम किया था। उसका दावा था कि अस्पताल प्रबंधन ने उसे ₹6,000 मासिक वेतन देने का वादा किया था, लेकिन खर्च के नाम पर उसे केवल ₹1,500 से ₹2,000 ही दिए जाते थे। बकाये पैसे दिए बिना ही अस्पताल प्रबंधन ने उसे काम से हटा दिया था। इसी बकाया राशि और गुस्से के कारण उसने पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के करीबी बताए जाने वाले इस अस्पताल संचालक से व्हाट्सएप के जरिए रुपयों की मांग की थी।

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