फर्जी आधार कार्ड बनाने और जाली दस्तावेजों के आधार पर बांग्लादेशी नागरिक का पासपोर्ट बनवाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड/मुख्य अभियुक्त को पुलिस ने किया गिरफ्तार

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ०४ अक्टूबर
फर्जी आधार कार्ड बनाने और जाली दस्तावेजों के आधार पर बांग्लादेशी नागरिक का पासपोर्ट बनवाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड/मुख्य अभियुक्त एजाज कमर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले पुलिस इस मामले में दो अन्य अभियुक्तों (कन्हाई कुमार मिश्रा और सुजीत कुमार) को भी गिरफ्तार कर चुकी है। नगर थाना पुलिस ने नगर थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित ‘कन्हाई कम्युनिकेशन’ नामक साइबर कैफे पर छापेमारी की थी। पुलिस ने यहाँ से कन्हाई कुमार मिश्रा के कर्मी साहिल कुमार और सुजीत को दबोचा था। इसके बाद मुख्य मास्टरमाइंड एजाज कमर की गिरफ्तारी हुई है। जांच में मुख्य अभियुक्त के लंदन कनेक्शन और एक बांग्लादेशी नागरिक (मो. बेलाल होसन) के नाम पर फर्जी पासपोर्ट जारी कराने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस ने इस रैकेट के पास से भारी मात्रा में अवैध डिजिटल उपकरण, 02 लैपटॉप और 02 मोबाइल फोन, 01 अंगूठे का क्लोन (थम्ब इम्प्रेशन), 01 आइरिस स्कैनर और 01 फिंगर स्कैनर, 08 मूल आधार कार्ड और आधार नामांकन सॉफ्टवेयर (UIDAI मशीन) जब्त किए हैं. पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह छपरा के एक व्यक्ति की यूजर आईडी और मोबाइल ओटीपी का उपयोग करके यूआईडीएआई (UIDAI) मशीन को अवैध रूप से लॉगिन करता था। इसके बाद ‘बाबा आरटीएपीएस’ और ‘राजमिस्त्री डॉट एक्सवाइजेड’ जैसी अवैध वेबसाइटों के माध्यम से फर्जी आधार और आवासीय प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। इसी फर्जी आधार के जरिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, पटना से बांग्लादेशी नागरिक का पासपोर्ट (नंबर U2185640) वर्ष 2020 में बनवाया गया था, जिसे बाद में गलत जानकारी पाए जाने पर रद्द कर दिया गया था। नगर पुलिस अधीक्षक (City SP) मो. मोहिबुल्लाह अंसारी ने प्रेस वार्ता आयोजित कर इस पूरे मामले के तकनीकी पहलुओं और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा किया है। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए घटनाक्रम, इस रैकेट के काम करने के तरीके (Modus Operandi) और पुलिस की आगामी रणनीति के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। नगर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मुख्य अभियुक्त एजाज कमर की गिरफ्तारी के बाद इस रैकेट का लंदन कनेक्शन और विदेशी नागरिकों को अवैध दस्तावेज देने का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। नगर पुलिस अधीक्षक (City SP) ने स्पष्ट किया कि यह गिरोह यूआईडीएआई (UIDAI) मशीन को अवैध रूप से एक्सेस करने के लिए छपरा के एक ऑपरेटर की यूजर आईडी और मोबाइल ओटीपी का दुरुपयोग कर रहा था। इसके बाद वे अवैध क्लोन वेबसाइट्स के माध्यम से फर्जी दस्तावेज जनरेट करते थे। सिटी एसपी ने बताया कि चूंकि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी नागरिकों को फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट दिलाने से जुड़ा है, इसलिए पुलिस केंद्रीय जांच एजेंसियों और आईबी (Intelligence Bureau) से भी समन्वय स्थापित कर रही है। गिरोह ने साल 2020 में एक बांग्लादेशी नागरिक मो. बेलाल होसन का भी पासपोर्ट बनवाया था, जिसकी गहनता से स्क्रूटनी की जा रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस द्वारा छापेमारी के दौरान जब्त किए गए उपकरणों आइरिस स्कैनर, थम्ब इम्प्रेशन क्लोन, फिंगर स्कैनर, लैपटॉप और बरामद किए गए मूल आधार कार्ड को मीडिया के सामने पेश किया गया। नगर पुलिस अधीक्षक ने साफ किया है कि साइबर कैफे (‘कन्हाई कम्युनिकेशन’) के संचालकों और मुख्य मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद अब उन सभी लोगों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इस सेंटर से फर्जी दस्तावेज बनवाए हैं। इस बड़े फर्जीवाड़ा रैकेट के भंडाफोड़ और मास्टरमाइंड एजाज कमर की गिरफ्तारी के बाद आयोजित की गई प्रेस वार्ता में नगर पुलिस अधीक्षक (City SP) के साथ नगर थानाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह DIU (जिला आसूचना इकाई) की विशेष टीम और छापेमारी दल का हिस्सा रहे अन्य उप-निरीक्षक (Sub-Inspectors) और नगर थाने के सशस्त्र बल के जवान भी मौजूद रहे, जिन्होंने शुरुआती गुप्त सूचना के आधार पर साइबर कैफे और अन्य ठिकानों पर रेड की थी।




