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भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव-सह-केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी ने खेतों और विभिन्न विकास कार्यों का किया गहन निरीक्षण

ध्रुव कुमार सिंह, सीतामढ़ी, बिहार, १३ सितम्बर

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव-सह-केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी, संजय कुमार अग्रवाल (IAS) ने सीतामढ़ी जिले का दौरा कर खेतों और आकांक्षी जिला व प्रखंड कार्यक्रमों के तहत चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का गहन निरीक्षण किया। संयुक्त सचिव ने सीतामढ़ी के बाजपट्टी प्रखंड की बाजपट्टी गोट पंचायत में जाकर सीधे खेतों का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों से संवाद कर उन्हें परंपरागत खेती से हटकर फसल विविधीकरण (Crop Diversification), दलहन (Pulses), सब्जी उत्पादन और पानी की बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। श्री अग्रवाल ने किसानों द्वारा लगाई गई धान की फसल का निरीक्षण किया। कम वर्षा के बावजूद कठिन परिश्रम से फसलों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए उन्होंने किसानों की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु और कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को उपलब्ध जल का वैज्ञानिक एवं किफायती उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें फसल विविधीकरण, कम पानी वाली फसलों तथा नई एवं अधिक लाभकारी फसलों को अपनाना चाहिए। उन्होंने किसानों को डिजिटल फसल सर्वेक्षण, फार्मर रजिस्ट्री, किसान उत्पादक संगठन, किसान क्रेडिट कार्ड, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा अन्य कृषि योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जलजमाव वाली निचली एवं अनुपयोगी भूमि को आय के अवसर में बदलने के लिए मखाना की खेती को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया। भ्रमण के दौरान श्री अग्रवाल ने पाया कि कई किसानों द्वारा मचान बनाकर सब्जियों की खेती की जा रही है। किसानों के इस अभिनव प्रयास से वे काफी प्रभावित हुए और इसकी सराहना की। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को मचान विधि सहित वैज्ञानिक तरीके से सब्जियों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को बाजार में अधिक मांग वाली तथा अपेक्षाकृत अधिक समय तक सुरक्षित रहने वाली सब्जियों, विशेषकर मिर्च तथा अन्य लाभकारी हरी सब्जियों की खेती बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सब्जी उत्पादन से किसान कम क्षेत्र में भी अधिक आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। श्री अग्रवाल ने जिला उद्यान पदाधिकारी को निर्देश दिया कि किसानों को सब्जियों की वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित किया जाए तथा उन्हें उपयुक्त तकनीकी मार्गदर्शन और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने सब्जी उत्पादक किसानों को संबंधित सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने स्थानीय किसानों द्वारा लगाए गए आम के बगीचों का भी निरीक्षण किया। किसानों को बगीचों के वैज्ञानिक एवं समुचित प्रबंधन के साथ-साथ बगीचों में उपलब्ध खाली स्थानों पर अदरक, हल्दी तथा जिमीकंद जैसी छाया-सहिष्णु फसलों की खेती करने की सलाह दी गई। कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए श्री अग्रवाल ने जल संरक्षण तथा सिंचाई जल के दक्ष उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक किसानों को सूक्ष्म सिंचाई सुविधाओं से लाभान्वित करने का निर्देश दिया। उन्होंने ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देने तथा पात्र किसानों को योजना की जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई से कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव होगी और फसलों की उत्पादकता भी बढ़ेगी। आगामी रबी मौसम के लिए श्री अग्रवाल ने किसानों को मसूर तथा अन्य दलहनी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उड़द की बाजार में अच्छी मांग है, इसलिए उपयुक्त क्षेत्रों में किसानों को इसकी खेती भी करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य में सुधार करती हैं। इससे उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम होने के साथ-साथ उन्हें अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है। श्री अग्रवाल ने रबी फसल की कटाई और खरीफ की बुआई के बीच उपलब्ध अवधि में मूंग की खेती को तीसरी फसल के रूप में अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मूंग की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी तथा मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार होगा। ग्रामीणों द्वारा एम.एल.सी. के काम नहीं करने की शिकायत किए जाने पर श्री अग्रवाल ने संबंधित स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने लघु सिंचाई विभाग के नलकूप प्रमंडल के उप अभियंता को इसे यथाशीघ्र ठीक कर सिंचाई सुविधा बहाल करने का निर्देश दिया, ताकि किसानों को फसलों की सिंचाई में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों से जुड़ी सिंचाई समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। भ्रमण के दौरान श्री अग्रवाल ने गांव के स्थानीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, विद्यालय में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर उनकी शैक्षणिक समझ का भी आकलन किया। श्री अग्रवाल ने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने, मन लगाकर पढ़ाई करने तथा जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा, परिश्रम और अनुशासन के माध्यम से बच्चे अपने परिवार, गांव एवं जिले का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विद्यालय में पठन-पाठन की गुणवत्ता, बच्चों एवं शिक्षकों की नियमित उपस्थिति तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को और बेहतर बनाने का निर्देश दिया। संयुक्त सचिव के सहज एवं प्रेरणादायी संवाद से विद्यार्थी और ग्रामीण काफी प्रसन्न एवं उत्साहित दिखाई दिए। श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों एवं ग्रामीणों द्वारा उठाई गई समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि एवं विकास योजनाओं का प्रभाव केवल अभिलेखों तक सीमित न रहकर खेतों में उत्पादन, जल के बेहतर उपयोग, किसानों की आय तथा ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। जिला जनसम्पर्क अधिकारी कमल सिंह नें बताया की श्री अग्रवाल बिहार कैडर के वर्ष 2002 बैच के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। वे नालंदा, गया, जहानाबाद एवं पटना जिलों के जिलाधिकारी तथा पटना प्रमंडल के आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे बिहार सरकार में जल संसाधन, परिवहन, कृषि एवं आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के सचिव भी रहे हैं। वर्तमान में श्री अग्रवाल भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। भारत सरकार द्वारा उन्हें सीतामढ़ी एवं मधुबनी जिलों का केंद्रीय नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है, ताकि केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा, प्रभावी समन्वय एवं त्वरित क्रियान्वयन के माध्यम से दोनों जिलों के विकास कार्यों को गति प्रदान की जा सके।

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