बच्चों को धूप में खड़ा रखने के मामले में ऑक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल पर कार्रवाई, प्रमंडलीय आयुक्त ने प्राथमिकी दर्ज करने का दिया सख्त आदेश

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २० मई
विद्यालयों में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार एवं सरकारी मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रमंडलीय आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि विद्यालय प्रबंधन बच्चों के साथ अमानवीय, अनैतिक एवं अवैध व्यवहार न करें तथा विद्यालय का संचालन सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करें। इसी क्रम में आयुक्त द्वारा मुजफ्फरपुर शहर के भगवानपुर स्थित ऑक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का सख्त आदेश जारी किया गया है। यह मामला प्रभात तारा हॉस्पिटल के पास भगवानपुर में संचालित ऑक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल से जुड़ा है, जहां विद्यालय में व्याप्त कथित कुव्यवस्था एवं बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार की शिकायत सामने आई थी। पंकज कुमार नामक अभिभावक ने अपने बच्चे के साथ विद्यालय में किये गये व्यवहार को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त से शिकायत की थी। इसके साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी लिखित शिकायत दर्ज की थी। शिकायत में उल्लेख किया गया कि उनका बच्चा निर्धारित स्कूल ड्रेस में विद्यालय नहीं पहुंचा था, जिसके कारण विद्यालय प्रबंधन द्वारा उसे लगभग आधे घंटे तक कड़ी धूप में खड़ा रखा गया। इसके कारण बच्चे की तबीयत खराब हो गई। शिकायतकर्ता ने इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए अमानवीय, अनैतिक एवं अवैध कृत्य करार दिया। मामला संज्ञान में आते ही प्रमंडलीय आयुक्त ने इसे अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। बच्चों के हितों की सुरक्षा, विद्यालयी व्यवस्था की पारदर्शिता तथा सरकारी मानकों के अनुपालन की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया। जांच दल में उप-निदेशक सामाजिक सुरक्षा धीरज कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी अरविंद कुमार सिन्हा तथा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुजीत कुमार दास को शामिल किया गया। जांच टीम द्वारा विद्यालय का निरीक्षण करने के बाद कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि ऑक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल बिना किसी संबद्धता के संचालित हो रहा है। इसके अतिरिक्त विद्यालय में बच्चों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त वर्ग कक्ष, फर्नीचर, पुस्तकालय एवं खेलकूद मैदान जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। जांच दल ने कहा कि विद्यालय सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों का पालन करने में विफल पाया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा मनमाने तरीके से फीस वृद्धि की जा रही थी साथ ही छात्रों को ड्रेस एवं पुस्तकें किसी विशेष दुकान से ही खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा था। जांच टीम ने इसे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने तथा नियमों के उल्लंघन का मामला माना है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद प्रमंडलीय आयुक्त ने विद्यालय प्रबंधन के रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का अमानवीय व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। विद्यालय शिक्षा एवं संस्कार का केंद्र होता है, जहां बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए। यदि किसी विद्यालय में बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन होता है या सरकारी मानकों की अनदेखी की जाती है तो प्रशासन उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करेगा। प्रमंडलीय आयुक्त ने संबंधित विद्यालय संचालक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देते हुए कहा कि सरकारी दिशा-निर्देशों के विपरीत विद्यालय संचालन तथा बच्चों के साथ अभद्र एवं अमानवीय व्यवहार गंभीर और गैरकानूनी कृत्य है। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले के अन्य निजी विद्यालयों की भी नियमित जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी विद्यालय निर्धारित मानकों एवं नियमों का पालन करें। प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी विद्यालय द्वारा नियमों की अवहेलना या बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




