जिला प्रभारी सचिव ने सकरा, मुरौल और बंदरा प्रखंड अंतर्गत संचालित “सहयोग शिविर” का किया निरीक्षण, उपभोक्ता को सीधे फोन कर सेवा और सुविधा का किया सत्यापन
जनता के द्वार पहुंचा प्रशासन, सहयोग शिविरों में तुरंत सुलझ रही लोगों की समस्याएं, “अब दफ्तर नहीं, गांव में मिल रहा समाधान”, सहयोग शिविरों से बढ़ा ग्रामीणों का भरोसा

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, १९ मई
मुजफ्फरपुर जिले में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के निमित्त 19 मई को 23 स्थलों पर आयोजित “सहयोग शिविर” लोगों के बीच भरोसे का माध्यम बन रहा हैं। इसी क्रम में जल संसाधन विभाग के सचिव-सह-जिला प्रभारी सचिव डॉ.चंद्रशेखर सिंह ने जिले के मुरौल, सकरा एवं बंदरा प्रखंडों में आयोजित सहयोग शिविरों का निरीक्षण किया और शिविर संचालन की व्यवस्था, प्राप्त आवेदनों के निष्पादन तथा लाभुकों को दी जा रही सेवाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार केवल आवेदन प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि प्रत्येक शिकायत का वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। सचिव श्री सिंह ने शिविरों में मौजूद विभागवार स्टॉलों का निरीक्षण कर अधिकारियों एवं कर्मियों से अब तक प्राप्त आवेदनों, पोर्टल के माध्यम से आये मामलों तथा उनके निष्पादन की स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं कैंप प्रभारी को निर्देश दिया कि प्रत्येक आवेदन का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सहयोग शिविर के द्वारा प्रशासन जनता के द्वार पर जाकर उनकी समस्याएं सुन रही हैं तथा उसका निवारण कर रही है। उन्होंने लोगों की समस्याओं के वास्तविक निवारण की आवश्यकता पर बल दिया। सकरा प्रखंड के वाजिदपुर बुजुर्ग पंचायत में आयोजित शिविर के दौरान सचिव ने निरीक्षण को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि स्वयं मौके पर सत्यापन कर व्यवस्था की प्रभावशीलता को परखा। बिजली विभाग के काउंटर पर मौजूद कर्मियों से उन्होंने आवेदन एवं निष्पादन से संबंधित संधारित पंजी की जांच की। इसके बाद उन्होंने रेंडम तरीके से एक बिजली उपभोक्ता को मोबाइल फोन से कॉल कर सेवा की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। उपभोक्ता ने बताया कि उसने खराब बिजली मीटर की शिकायत सहयोग शिविर में दर्ज कराई थी और उसकी समस्या का तत्काल समाधान करते हुए नया मीटर लगा दिया गया है। उपभोक्ता ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि सहयोग शिविर केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान की दिशा में प्रभावी पहल बन चुका है। निरीक्षण के दौरान सचिव ने शिविर में पहुंचे शिकायतकर्ताओं एवं लाभार्थियों से भी सीधा संवाद किया और उनसे फीडबैक प्राप्त किया। ग्रामीणों ने सरकार की इस पहल की खुले मन से सराहना की। लोगों ने कहा कि पहली बार प्रशासन स्वयं गांव तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुन रही है और त्वरित समाधान भी कर रही है। शिविर में वरीय अधिकारियों की मौजूदगी से लोगों में विश्वास बढ़ा है और उन्हें यह महसूस हो रहा है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना था कि पहले छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए प्रखंड एवं जिला कार्यालयों का कई बार चक्कर लगाना पड़ता था, लेकिन अब उनके दरवाजे पर ही सुनवाई और समाधान दोनों हो रहे हैं। मुरौल प्रखंड के मीरापुर में आयोजित शिविर में सचिव ने स्कूली छात्राओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। छात्राओं ने कृषि की नवीन तकनीकों तथा भौगोलिक दृष्टिकोण से दिन-रात एवं मौसम परिवर्तन से संबंधित आकर्षक मॉडल प्रस्तुत किए थे। सचिव ने बच्चियों से प्रदर्शित विषयवस्तु की भी जानकारी प्राप्त की और उनके रचनात्मक कार्यों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और ऐसे मंच उन्हें अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो मुरौल प्रखंड के मीरापुर शिविर में कुल 283 आवेदन प्राप्त हुए। वहीं सकरा के वाजिदपुर बुजुर्ग शिविर में 232 आवेदन प्राप्त हुए, जिनका निष्पादन किए जाने की जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा दी गई। बंदरा प्रखंड में आयोजित शिविर में 168 आवेदन प्राप्त हुए जिसमें 125 का निष्पादन कर दिया गया है और लंबित मामलों की भी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। शिविर के दौरान लाभार्थियों के बीच ट्राई साइकिल, चश्मा समेत अन्य आवश्यक सामग्रियों का वितरण भी किया गया। इससे दिव्यांग एवं जरूरतमंद लोगों को काफी राहत मिली। लाभुकों ने सरकार एवं प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य सरकार आम नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शिविर की तिथि का इंतजार करने के बजाय पोर्टल के माध्यम से कभी भी अपनी शिकायत दर्ज करें। उन्होंने बताया कि सरकार ने इसके लिए सुदृढ़ ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की है ताकि समयबद्ध तरीके से गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिविर में प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से निष्पादन किया जाए। निर्धारित समयसीमा का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमसंगत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सहयोग शिविर सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाना है। जिला स्तर के वरीय अधिकारियों को नोडल पदाधिकारी एवं कैंप प्रभारी बनाकर शिविरों की लगातार निगरानी कराई जा रही है ताकि सभी तैयारियां सरकारी मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप हों और जनता को बेहतर सेवा मिल सके। जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि सहयोग शिविर का अगला चरण 2 जून को जिले के 23 स्थलों पर आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। लोगों का मानना है कि जिस प्रकार लोगों की भागीदारी और भरोसा बढ़ रहा है, उससे यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जनसमस्याओं के समाधान का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है।






