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BRABU के कुलपति प्रो.दिनेश चंद्र राय ने मुजफ्फरपुर के MSKB कॉलेज में बिहार आर्थिक संघ के दो दिवसीय 23वें वार्षिक सम्मेलन का किया उद्घाटन

9-10 मई 2026 को आयोजित इस सम्मेलन में "2047 तक समावेशी और सतत विकास के लिए रोडमैप" पर की जा रही है चर्चा, जिसमें बिहार, झारखण्ड सहित देशभर के अर्थशास्त्री हैं शामिल

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ०९ मई

मुजफ्फरपुर के महिला शिल्प कला भवन (MSKB) कॉलेज में 9 और 10 मई को बिहार आर्थिक संघ (Economic Association of Bihar) के 23वें वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय अधिवेशन का उद्घाटन बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.दिनेश चंद्र राय ने किया। इस कार्यक्रम में अकादमिक विशेषज्ञों और गणमान्य व्यक्तियों ने आर्थिक रुझानों और नीतियों का पता लगाने के लिए भाग लिया, जिससे क्षेत्रीय विकास और बौद्धिक विमर्श में विश्वविद्यालय की सक्रिय भूमिका उजागर हुई। इस अवसर पर बीआरएबीयू के कुलपति प्रो.राय ने प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों के साथ क्षेत्रीय आर्थिक अनुसंधान पर एक महत्वपूर्ण संवाद का नेतृत्व करते हुए कहा कि देश की अर्थनीति ऐसी बने कि जनता की भागीदारी अधिक से अधिक हो। सरकार टैक्स ले तो अधिकांश लोग हिस्सेदारी निभाएं। लोगों को ऐसा महसूस न हो कि सरकार हमसे वसूल रही है और इसके बदले में आमजनों के लिए बेहतर काम हो। कुलपति ने कहा देश की तासीर के हिसाब से विकास को गढ़ना होना। हमारा देश गांव, गंगा और गाय की संस्कृति से बना है। तकनीक कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत में किसानों को सम्मान की नजर से देखना चाहिए। हमारे यहां की मिट्टी, पानी सबसे बेहतर है। इसके बावजूद इजरायल की तकनीक की बात करते हैं यह उचित नहीं है। अभी स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम होना देश में जरूरी है। आईइए के मुख्य संयोजक और ईएबी के संस्थापक सचिव डॉ. अनिल कुमार ठाकुर नें कहा की बिहार आर्थिक संघ (ईएबी) के 23वें वार्षिक अधिवेशन का केंद्रीय विषय ‘विकसित भारत @ 2047: समावेशी और सतत विकास के लिए रोडमैप’ है। सम्मेलन का लक्ष्य नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को एक मंच प्रदान करना है ताकि 2047 तक भारत को एक समृद्ध और वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण राष्ट्र बनाने के लिए रणनीतियों पर चर्चा की जा सके। अधिवेशन में देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, भविष्य की चुनौतियों, मुद्रास्फीति (inflation), रोजगार और गरीबी जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक पहलुओं पर चर्चा निर्धारित की गई है। यह आयोजन 200 से अधिक प्रतिभागियों के लिए एक उच्च स्तरीय शैक्षणिक मंच के रूप में कार्य करता है, जहां उन्होंने स्वतंत्रता शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में परिवर्तित करने की रणनीतियों पर चर्चा की। डॉ.ठाकुर नें कहा की सम्मेलन को पाँच मुख्य स्तंभों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है, जिनका उद्देश्य “विकसित भारत” के लिए एक रोडमैप तैयार करना है. इसमें विकसित भारत: सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से आगे बढ़कर समग्र और सतत विकास मानकों को शामिल करना। संरचनात्मक परिवर्तन: आत्मनिर्भर, प्रौद्योगिकी-आधारित विकास पर ध्यान केंद्रित करना। वित्तीय सुधार: विकास वित्त और संस्थागत सुधारों पर चर्चा। वैश्विक रणनीति: आर्थिक कूटनीति और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका का विश्लेषण एवं राज्य स्तरीय परिप्रेक्ष्य: बिहार के विशिष्ट आर्थिक योगदान और विकास मॉडल का विश्लेषण शामिल है. इसके साथ ही सम्मेलन में डॉ.मनमोहन सिंह स्मृति व्याख्यान और डॉ.तारा शंकर प्रसाद सिंह स्मृति व्याख्यान आयोजित किए गए। डॉ.ठाकुर नें कहा की दो दिनों के मंथन के बाद, इसमें शामिल सुझावों को सरकार को भेजा जाएगा। इस सम्मेलन में भारतीय ज्ञान प्रणाली, सतत विकास, और सतत आर्थिक चिंतन जैसे मुद्दों पर पैनल डिस्कशन भी होगा।  सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों सहित पड़ोसी देश नेपाल के अर्थशास्त्री भी शामिल हुए। प्रमुख विशेषज्ञों में मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक डॉ. एनआर भानुमूर्ति नें कहा कि जब पूरी दुनिया का जीडीपी ग्रोथ नीचे की ओर जा रहा है, भारत का जीडीपी ग्रोथ  6.5 है। पिछले दो साल से इंडिया गोल्डीलॉक्स स्थिति का सामना कर रहा है। यानी अधिक ग्रोथ लेकिन लो इनफ्लेशन। विकसित भारत @2047 को प्राप्त करने के लिए उत्पादकता और निवेश पर विशेष जोड़ देने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि सह कुलपति,जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा, प्रो. (डॉ.) परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने कहा कि भारत की धमक दुनिया में बनी है। भारत नेतृत्व की स्थिति में बना है लेकिन विकसित भारत में देश में जितने भी तरह की विविधताएं हैं उसे साथ लेकर चले। अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचे। प्रारंभिक भाषण देते हुए आईईए के महासचिव डॉ.रविंद्र के. ब्रह्मे ने कहा कि आज का जो संकट है उससे उभरना होगा। यूथ हमारी मजबूती हैं। विकसित भारत में उन्हें हम किस तरह से शामिल करें इसपर ध्यान देना होगा। हमें ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों पर काम करना होगा। तेल की आपूर्ति के का संकट है इसके लिए इसके विकल्प पर काम करना होगा। प्रतिभागियों ने समकालीन आर्थिक चुनौतियों से संबंधित लगभग 200 शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रमुख विशेषता भारतीय ज्ञान प्रणाली पर एक पैनल चर्चा थी, जिसमें यह पता लगाया गया कि सतत विकास के लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक आर्थिक चिंतन के साथ कैसे एकीकृत किया जा सकता है। इन सत्रों के प्रस्तावों और निष्कर्षों को नीतिगत सुझावों के रूप में औपचारिक रूप से सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। स्वागत भाषण सम्मेलन के संयोजक डॉ.राकेश कुमार सिंह, संचालन आईईए के संयुक्त सचिव डॉ.एस. नारायणन तथा धन्यवाद ज्ञापन ईएबी के सचिव डॉ.राजेश कुमार नें किया. इस अवसर पर प्रो.बिक्रमा सिंह, बीआरएयू के कुलानुशासक प्रो.रवीन्द्र कुमार चौधरी, पूर्व कुलसचिव प्रो.संजय कुमार, प्राचार्या प्रो.कनुप्रिया, प्रो.ममता रानी, प्रो.अमिता शर्मा, प्रो. बिरेन्द्र कुमार चौधरी, प्रो.सी.के.पी. शाही, प्रो.के.एन. यादव, प्रो.बी.पी. चंद्रमोहन, डॉ.पूनम कुमारी, डॉ.अंग्रेज सिंह राणा, डॉ.कुमारी मनीषा, डॉ.मुकुल बाबु, डॉ.बालाकान्त शर्मा, डॉ.सुपन प्रसाद सिंह, डॉ.अमर बहादुर शुक्ला, डॉ.साद बिन हामिद, डॉ.तनवीर निजामी, डॉ.ध्रुव कुमार सिंह, डॉ.दानिश सब्बीर, डॉ.अविनाश कुमार, डॉ.विकास कुमार शांडिल्य, डॉ.प्रदीप कुमार, डॉ.अनिल कुमार, डॉ.अरविन्द कुमार, डॉ.चिन्मय प्रकाश, डॉ.बिनोद कुमार दत्त सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित थें.  

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