जिला कृषि टास्क फोर्स की बैठक में डीएम ने निर्देश दिया कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा दें ताकि इससे किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि हो सके और खेती को अधिक लाभकारी एवं जल-संवेदनशील बनाया जा सके

ध्रुव कुमार सिंह, सीतामढ़ी, बिहार, १८ जून
जिलाधिकारी रिची पांडेय की अध्यक्षता में जिला कृषि टास्क फोर्स की बैठक आज विमर्श सभा कक्ष में आयोजित की गई. बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी,जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला जन संपर्क अधिकारी कमल सिंह सहित अन्य विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में जिलाधिकारी ने जिला कृषि पदाधिकारी, कृषि वैज्ञानिक आत्मा तथा अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा दें ताकि इससे किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि हो सके और खेती को अधिक लाभकारी एवं जल-संवेदनशील बनाया जा सके। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिले में धान की बुआई की प्रगति 47.73 प्रतिशत दर्ज की गई है। जिलाधिकारी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को शेष लक्ष्य की प्राप्ति हेतु बुआई कार्य में अपेक्षित गति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सबसे अधिक सोनवर्षा में 90% एवं सुरसंड में 87% जबकि सबसे कम सुप्पी में लगभग 11% है। बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि उर्वरक वितरण तथा बीज वितरण में पूरी पारदर्शिता बढ़ती जाए । इससे संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कृषि पदाधिकारी ने बताया जिले में अभी यूरिया की उपलब्धता 13553 मेट्रिक टन है जबकी डीएपी 4902.45 एमटी है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि उर्वरक की कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करें।विशेष कर बॉर्डर एरिया के पंचायत में लगातार छापेमारी की जाए। दुकानदारों का स्टॉक वेरिफिकेशन किया जाए। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि अप्रैल से लेकर जून 2026 तक कुल 722 छापेमारी की गई है। 42 में अनियमितता पाई गई है। 03 पर प्राथमिक दर्ज की गई है। 09 की अनुज्ञप्ति रद्द की गई है जबकि 01 को निलंबित किया गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परंपरागत धान आधारित एकतरफा कृषि पद्धति से हटकर किसानों को अन्य लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित किया जाए। उन्होंने विशेष तौर पर मखाना, सोयाबीन, मड़ुआ, मक्का एवं अन्य मिलेट्स जैसी नगदी फसलों को अपनाने की जरूरत पर बल दिया।उन्होंने कहा “आज की आवश्यकता यह है कि हम खेती को केवल परंपरा से नहीं, वैज्ञानिक सोच और बाजार की मांग से जोड़ें। किसानों को जागरूक कर फसल विविधीकरण की दिशा में ठोस पहल की जाए. आत्मा के समीक्षा के क्रम में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य के विरुद्ध शत-प्रतिशत उपलब्धि करना सुनिश्चित करें। पशुपालन विभाग के समीक्षा के क्रम में कृत्रिम गर्भधारण,मैत्री केंद्र,पशु टीकाकरण, मोबाइल चिकित्सा इत्यादि की समीक्षा की गई एवं निर्देश दिया गया कि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी प्रतिबद्धता के साथ करें ताकि पशुपालकों को इसका लाभ मिल सके। बैठक में इसकी अतिरिक्त गन्ना विकास म,आत्मा, मत्स्य तथा संबंधित अन्य विभागों की समीक्षा की गई।




