लंगट सिंह कॉलेज में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्या प्रो. कनुप्रिया ने दिनकर जी के साहित्य को केवल ‘हुंकार’ (क्रांति/विरोध) नहीं, बल्कि चिंतन की धरोहर बताया

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २४ अप्रैल
लंगट सिंह महाविद्यालय (L.S. College) में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्या प्रो.कनुप्रिया ने दिनकर जी के साहित्य को केवल ‘हुंकार’ (क्रांति/विरोध) नहीं, बल्कि चिंतन की धरोहर बताया। लंगट सिंह कॉलेज के दिनकर पार्क में स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दिनकर जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए प्रो.कनुप्रिया ने कहा कि दिनकर जी की रचनाएँ केवल तत्कालीन विरोध नहीं थीं, बल्कि उनमें गहरा राष्ट्रीय चिंतन, सांस्कृतिक बोध और दर्शन निहित है, जो आज भी प्रासंगिक है। प्राचार्या नें कहा की दिनकर जी को ‘कुरुक्षेत्र’ जैसी रचनाओं के लिए जाना जाता है, जो देशभक्ति के साथ-साथ युगीन समस्याओं पर गहराई से विचार करती हैं। लंगट सिंह कॉलेज से उनके लगाव पर चर्चा करते हुए कनुप्रिया ने कहा, दिनकर जी केवल एक कवि नहीं, बल्कि युगदृष्टा थे। उन्होंने इसी परिसर में शिक्षक रहते हुए समाज को जगाने वाली कालजयी रचनाएँ लिखीं। सच तो यह है कि लंगट सिंह कॉलेज का कण-कण उनकी स्मृतियों से ओतप्रोत है। इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव झा ने कहा कि दिनकर जी का सफर इसी कॉलेज के हिंदी विभाग से शुरू होकर राष्ट्रकवि के शिखर तक पहुँचा। संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि दिनकर जी की कविताएं आज भी समाज, युवा और राष्ट्र की चेतना को जागृत कर रही हैं। मौके पर प्रो.एस.आर चतुर्वेदी, डॉ.ऋतुराज कुमार, डॉ.अर्धेंदु, डॉ. वेदप्रकाश दुबे, डॉ.राजीव कुमार, डॉ.शशिकांत पाण्डेय, डॉ.स्वीटी सुप्रिया, डॉ.प्रदीप कुमार, डॉ.दीपक कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मी मौजूद रहे।





