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आकांक्षी जिला कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर का उत्कृष्ट प्रदर्शन, नीति आयोग से मिली करोड़ों की प्रोत्साहन राशि, बहुआयामी विकास को मिली रफ्तार, संपूर्णता अभियान 2.0 में शानदार प्रदर्शन

भारत सरकार में अपर सचिव सह केंद्रीय प्रभारी, मुजफ्फरपुर जिला ने अधिकारियों के साथ की बैठक, क्षेत्रभ्रमण कर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अधिकारियों की सक्रियता के लिए की प्रशंसा

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, १८ अप्रैल

भारत सरकार में अपर सचिव सह केंद्रीय जिला प्रभारी सुनील कुमार की अध्यक्षता में संपूर्णता अभियान के तहत संचालित जिला/ प्रखंड आकांक्षी कार्यक्रम की समीक्षात्मक बैठक मुजफ्फरपुर समाहरणालय सभागार में की गई। इसके पूर्व अपर सचिव ने क्षेत्र भ्रमण कर सरकार की विकासात्मक योजनाओं की जमीनी हकीकत का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने हरपुर बखरी पंचायत, मधुबनी पंचायत तथा खबड़ा पंचायत में संचालित योजनाओं- सोलर पावर इरिगेशन  सहित नीति आयोग के तहत संचालित कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। समीक्षात्मक बैठक में जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने पीपीटी के माध्यम से जिला/ प्रखंड आकांक्षी कार्यक्रम के तहत संचालित कार्यों की अद्यतन स्थिति एवं प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। अपर सचिव ने  अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा एवं समर्पण भाव की तारीफ करते हुए किये गये कार्यों को जानोपयोगी बनाये रखने हेतु प्रयासरत रहने की आवश्यकता पर बल दिया। समीक्षा के दौरान पाया गया कि जिले के समग्र और तीव्र विकास के उद्देश्य से संचालित आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत मुजफ्फरपुर जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, वित्तीय समावेशन और आधारभूत संरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए गए समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप जिले को कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। नीति आयोग द्वारा जिले को बेहतर प्रदर्शन के लिए करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है, जिससे विकास कार्यों को और गति मिली है। जिले की उपलब्धियो को रेखांकित करते हुए बताया गया कि वर्ष 2019-20 में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मुजफ्फरपुर को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ और 3 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली। इसके बाद वर्ष 2020-21 में कृषि एवं जल संसाधन के क्षेत्र में भी जिला पहले स्थान पर रहा, जिसके लिए 3 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। वर्ष 2021-22 में ओवरऑल प्रदर्शन में जिले ने दूसरा स्थान प्राप्त किया और 2 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त की। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 के दौरान स्वास्थ्य एवं पोषण तथा ‘नर्चर एंड केयर’ श्रेणी में बेहतर कार्य के लिए जिले को 3 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली। वर्ष 2024-25 में स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में पुनः प्रथम स्थान हासिल करते हुए जिले ने 3 करोड़ रुपये अर्जित किए। वहीं कृषि एवं जल संसाधन के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में भी प्रथम स्थान प्राप्त कर 3 करोड़ रुपये की राशि हासिल की। स्किल डेवलपमेंट एवं वित्तीय समावेशन में तीसरे स्थान के लिए 1 करोड़ रुपये और ओवरऑल प्रदर्शन में प्रथम स्थान प्राप्त कर 3 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी जिले को मिली। इस प्रकार कुल मिलाकर जिले को लगभग 33 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है। आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत प्राप्त इन निधियों का उपयोग विभिन्न विकास परियोजनाओं में किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार के लिए ‘प्रगति पाठशाला’ योजना लागू की गई, जिसके अंतर्गत 16 मिडिल स्कूलों और 16 उत्क्रमित उच्च विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया। साथ ही, 16  कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में पुस्तकालय स्थापित किए गए। जिले में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 90 मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए। इन स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से छात्रों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी समझ और सीखने की क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके अलावा 45 पंचायत सरकार भवनों में सामुदायिक लर्निंग सेंटर विकसित किए गए, जहां छात्रों और आम लोगों को पुस्तकालय, इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों की सुविधा मिल रही है। कृषि क्षेत्र में भी जिले ने कई नवाचार किए हैं। सौर ऊर्जा आधारित सामुदायिक सिंचाई प्रणाली को तीन प्रखंडों में लागू किया गया, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती और टिकाऊ व्यवस्था उपलब्ध हुई है। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार आया है। युवाओं में नवाचार और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देने के लिए जिले के 10 स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब स्थापित किए गए हैं। इन लैब्स में छात्र नई तकनीकों और वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से अपने कौशल का विकास कर रहे हैं। इससे उनमें रचनात्मकता और नवाचार की भावना को प्रोत्साहन मिला है। स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाया गया है। पोषण अभियान के तहत कुपोषण की दर में कमी लाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में भी जिले ने बेहतर कार्य किया है। बैंकिंग सेवाओं का विस्तार, जन-धन खातों की संख्या में वृद्धि और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। स्किल डेवलपमेंट के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने पर भी जोर दिया गया है। जिले में किए गए इन विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और मूल्यांकन नीति आयोग के डैशबोर्ड के माध्यम से किया गया, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई। जिला पदाधिकारी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू कर जिला  ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। नीति आयोग द्वारा प्रदान की गई प्रोत्साहन राशि का प्रभावी उपयोग कर जिले को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में लगातार प्रयास जारी है। जिलाधिकारी श्री सेन नें बताया की जिले में “संपूर्णता अभियान 2.0” के तहत संचालित विकास कार्यों ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन का उदाहरण प्रस्तुत किया है। आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) और आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम (ABP) के अंतर्गत निर्धारित प्रमुख सूचकांकों में शत-प्रतिशत संतृप्ति प्राप्त करने की दिशा में जिला प्रशासन ने सुनियोजित रणनीति और सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण सफलता अर्जित की है। यह अभियान 28 जनवरी 2026 से 14 अप्रैल 2026 तक संचालित किया गया, जबकि इसका औपचारिक शुभारंभ 2 फरवरी 2026 को हुआ। अभियान का मुख्य उद्देश्य ADP के 5 तथा ABP के 6 प्रमुख सूचकांकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करना था। इस दिशा में जिला प्रशासन ने सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया। अभियान के दौरान जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियमित रूप से जिला स्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में विभिन्न विभागों के कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की गई, कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया कि प्रत्येक सूचकांक में अधिकतम उपलब्धि प्राप्त हो सके। आकांक्षी प्रखंड मुसहरी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अधिकांश सूचकांकों में 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया गया है। स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालय सुविधा की उपलब्धता, आंगनबाड़ी केंद्रों में क्रियाशील शौचालय तथा पेयजल की व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पूर्ण उपलब्धि हासिल की गई। इसके अलावा, पशुओं के टीकाकरण (एफएमडी) में भी 100 प्रतिशत सफलता प्राप्त हुई, जो पशुपालन क्षेत्र में जागरूकता और सक्रियता का प्रमाण है। बच्चों के पोषण से जुड़े सूचकांकों में भी बेहतर प्रगति दर्ज की गई है। आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों के मापन कार्य में लगभग 99.95 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त हुई, जो स्वास्थ्य सेवाओं की सक्रियता को दर्शाता है। हालांकि, 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण उपलब्ध कराने में 76 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई, जिसे और बेहतर बनाने के लिए प्रयास जारी हैं। वहीं, आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत मुजफ्फरपुर जिले ने भी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। स्कूलों में बालिकाओं के लिए कार्यरत शौचालय की सुविधा में 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई, जो स्वच्छता और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सफलता है। आंगनबाड़ी केंद्रों एवं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHND) के आयोजन में 109.8 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई, जो निर्धारित लक्ष्य से भी अधिक है। यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जन्म के समय शिशुओं का वजन मापने के मामले में 97.20 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई, जबकि टीबी (क्षय रोग) के मामलों की पहचान में 94.35 प्रतिशत सफलता दर्ज की गई है। ये आंकड़े स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर निगरानी और कार्यप्रणाली को दर्शाते हैं। पशुओं के टीकाकरण के क्षेत्र में भी जिले ने सराहनीय प्रयास किए हैं। भौतिक सत्यापन में 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया गया है, जो जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन का संकेत देता है। जिला प्रशासन द्वारा अपनाई गई रणनीति, विभागों के बीच समन्वय, तथा नियमित मॉनिटरिंग ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी तथा जनसहयोग के कारण ही यह संभव हो पाया है कि अधिकांश सूचकांकों में जिले ने शत-प्रतिशत या उसके आसपास की उपलब्धि हासिल की है। जिला जनसम्पर्क अधिकारी प्रमोद कुमार नें बताया की संपूर्णता अभियान 2.0 के तहत मुजफ्फरपुर का यह प्रदर्शन न केवल जिले के विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है।

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