स्वामी विवेकानंद का साहस, आत्मविश्वास, सेवा और समरसता का आदर्श हर विद्यार्थी के जीवन का प्रेरणास्रोत होना चाहिए- लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त), राज्यपाल

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ११ सितम्बर
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया और नवनिर्मित विवेकानंद पार्क, आईटी सेल भवन व महाराजा गेट (प्रवेश द्वार) का उद्घाटन किया। छात्रों और प्राध्यापकों से संवाद (सीनेट हॉल) करते हुए उन्होंने शिक्षा में पारदर्शिता, खुले दिमाग से पढ़ाई और शोध की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का साहस, आत्मविश्वास, सेवा और समरसता का आदर्श हर विद्यार्थी के जीवन का प्रेरणास्रोत होना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि आध्यात्मिकता और मध्यम मार्ग ही भारतीयता की असली पहचान है, जिसे स्वामी विवेकानंद ने शिकागो धर्म सम्मेलन में भी रेखांकित किया था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में खुलेपन, स्वतंत्रता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ शोध और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बिहार के सभी 17 विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा में व्यापक एवं परिवर्तनकारी सुधार लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। राज्यपाल ने परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधा भी लगाया। कार्यक्रम के बाद कुछ छात्र संगठनों ने नाराज़गी जताई। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय परिसर में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं किया गया, जिसे उन्होंने बाबासाहेब का अपमान बताया। विश्वविद्यालय का नाम बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर होने के बावजूद, कार्यक्रम के दौरान परिसर में स्थित उनकी मुख्य प्रतिमा पर राज्यपाल द्वारा माल्यार्पण (फूलों की माला चढ़ाना) नहीं कराया गया। जबकि दूसरी तरफ, राज्यपाल द्वारा स्वामी विवेकानंद की नई प्रतिमा का अनावरण किया गया और उनके नाम पर बने पार्क का उद्घाटन हुआ। विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों और कुछ पूर्व प्रोफेसरों ने इसे बाबासाहेब का सीधा अपमान बताया। उनका कहना था कि जिस महापुरुष के नाम पर पूरी यूनिवर्सिटी है, उन्हें प्रोटोकॉल या कार्यक्रम की रूपरेखा में दरकिनार करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्रों का गुस्सा केवल राज्यपाल पर नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति (VC) पर भी फूटा। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर इस महत्वपूर्ण औपचारिकता को नजरअंदाज किया। कार्यक्रम खत्म होते ही छात्रों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी अलर्ट पर रखा गया था। छात्रों का स्पष्ट आरोप है कि कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा और रूट मैप विश्वविद्यालय प्रबंधन ने तैयार किया था. बाबासाहेब की मुख्य प्रतिमा कार्यक्रम स्थल से महज 50 कदम की दूरी पर थी. ऐसे में वहां राज्यपाल को न ले जाना कोई सामान्य चूक नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रबंधन की गंभीर लापरवाही और मनमानी है. छात्र नेताओं के कड़े विरोध और कुलपति (VC) पर “छोटी मानसिकता” के आरोपों के बावजूद, समाचार लिखे जाने तक विश्वविद्यालय प्रशासन या कुलपति की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.





