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पंचायत विकास दिवस ग्रामीण क्षेत्रों में सहभागी विकास की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल-  कुमार गौरव, जिलाधिकारी

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार २८ जून

ग्रामीण विकास को नई गति देने, ग्राम पंचायतों को अधिक जवाबदेह, सशक्त, पारदर्शी एवं जनसहभागी बनाने के उद्देश्य से मुजफ्फरपुर जिले की सभी 373 ग्राम पंचायतों में पंचायत सरकार भवनों में पंचायत विकास दिवस का सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्राम सभाओं का आयोजन कर पंचायतों में संचालित विकास योजनाओं की समीक्षा की गई, भावी कार्ययोजना तैयार की गई तथा पंचायत की आय-व्यय एवं अवशेष राशि पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाते हुए पंचायतों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को और मजबूत करना रहा। पंचायत विकास दिवस के अंतर्गत प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को ग्राम सभा आयोजित किए जाने की व्यवस्था की गई है, ताकि पंचायतों में संचालित योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा हो सके तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नई योजनाओं का चयन जनसहभागिता के आधार पर किया जा सके। इस पहल से ग्रामीण स्वयं विकास कार्यों की निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कुढ़नी प्रखंड के सकरी सरैया पंचायत में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी कुमार गौरव, उप-विकास आयुक्त श्रेष्ठ अनुपम, अनुमंडल पदाधिकारी पश्चिमी आकांक्षा आनंद, पंचायत की मुखिया बेबी कुमारी, जिला जनसम्पर्क अधिकारी प्रमोद कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन उप-विकास आयुक्त ने किया। इस वर्ष पंचायत विकास दिवस का विषय “महिला हितैषी पंचायत” निर्धारित किया गया। इसी क्रम में पंचायतों के विकास में महिलाओं की भूमिका, उनके सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सशक्तिकरण तथा सुरक्षित एवं समावेशी वातावरण के निर्माण पर विस्तार से चर्चा की गई। महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही महिलाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने तथा सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आर्थिक स्वावलंबन के साथ-साथ सामाजिक सम्मान एवं आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की अपील की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी श्री गौरव ने कहा कि किसी भी पंचायत का समग्र विकास तभी संभव है जब महिलाओं की भागीदारी प्रत्येक स्तर पर सुनिश्चित हो। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों से पंचायत के विकास कार्यों में महिलाओं को अधिकाधिक अवसर देने तथा निर्णय प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक आवश्यकता ही नहीं बल्कि ग्रामीण विकास की मजबूत आधारशिला भी है। उन्होंने कहा कि पंचायत विकास दिवस ग्रामीण क्षेत्रों में सहभागी विकास की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी, पंचायतों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा गांव के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। कार्यक्रम के दौरान कला जत्था द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता अभियान के तहत गीत-संगीत एवं नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए। कलाकारों ने नशा सेवन के दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए लोगों को नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को उपस्थित ग्रामीणों ने काफी सराहा। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए जिला पदाधिकारी एवं उप विकास आयुक्त ने पंचायत सरकार भवन परिसर में पौधारोपण भी किया तथा अधिकाधिक वृक्ष लगाने एवं उनकी सुरक्षा करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत की मुखिया बेबी कुमारी ने की। इस अवसर पर पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधि, ग्राम सभा के सदस्य, पंचायत सचिव, विकास मित्र, जीविका समूह की महिलाएं, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा कार्यकर्ता तथा विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पंचायत विकास दिवस के माध्यम से ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। यह आयोजन न केवल पंचायतों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सहभागी विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम भी बनेगा।

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