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बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में सामूहिक अवकाश लिया और विश्वविद्यालय मुख्यालय पर किया धरना-प्रदर्शन

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, १० अगस्त

बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) सहित राज्य के सभी परंपरागत विश्वविद्यालयों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में सामूहिक अवकाश लिया और विश्वविद्यालय मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन का मुख्य कारण सरकार द्वारा लाए जा रहे नए विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 का विरोध, जिसके तहत अंगीभूत महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों के नियंत्रण से हटाकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन करने का प्रस्ताव है। इसके विरोध में शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों की मांग है की विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शैक्षणिक स्वतंत्रता को बनाए रखना तथा नया कानून लागू करने से पहले शिक्षकों व कर्मचारियों के संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करना। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। 11 से 18 अगस्त 2026 तक काला बिल्ला लगाकर कार्य करने का भी निर्णय लिया गया है। प्रस्तावित ‘विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ के विरोध में  बिहार राज्य विश्वविद्यालय व महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के चरणबद्ध संघर्षात्मक व आन्दोलनात्मक कार्यक्रम के आह्वान के दूसरे चरण के घोषित कार्यक्रमानुसार राज्य के सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों सहित  बी.आर.ए.बिहार विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय कार्यालय व सभी विश्वविद्यालय विभागों एवं सभी महाविद्यालयों के सभी शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी (सोमवार) को सामूहिक अवकाश पर रहकर विश्वविद्यालय मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किए। विश्वविद्यालय मुख्यालय पर धरना के पूर्व राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के संयोजक फुटाब महासचिव प्रो.संजय कुमार सिंह व सदस्य राघवेन्द्र कुमार सिंह, प्रदेश महासचिव बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ पटना एवं बी.आर.ए.बिहार विश्वविद्यालय शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ.सुनील कुमार सिंह, व राम कुमार सहित विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों से आए शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मी लंगट सिंह महाविद्यालय स्थित गांधी उद्यान के निकट लंगट बाबू की प्रतिमा के पास एकजुट हुए। वहाँ से जुलूस की शक्ल में नारे लगाते हुए विश्वविद्यालय मुख्यालय पहुँचे और धरना-स्थल पर सभा में परिवर्तित हो गया। सभा की  संयुक्त रूप से मोर्चा के संयोजक डॉ.सुनील कुमार सिंह, राम कुमार ने अध्यक्षता की और संचालन बुस्टा महासचिव प्रो.रमेश प्रसाद गुप्ता ने की। राज्य संघर्ष मोर्चा के संयोजक विधान पार्षद प्रो.संजय कुमार सिंह ने प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक को लाने के पीछे सरकार की मंशा एवं उसे तत्काल रोकने में शिक्षक व स्नातक क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयासों एवं आगे की लम्बी लड़ाई तथा राज्य के विश्वविद्यालय शिक्षकों व कर्मचारियों के हितों के लिए संघ के ऐतिहासिक संघर्षों व भूमिका को रेखांकित किया। राज्य संघर्ष मोर्चा सदस्य राज्य कर्मचारी महासचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह व पश्चिम बंगाल से आए अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ, नई दिल्ली के सचिव जीतन कुमार ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए शिक्षक-कर्मचारियों की एकता को ऐतिहासिक जरूरत बताया। वक्ताओं में बूटा महासचिव डॉ.सुनील कुमार सिंह, बुस्टा कार्यकारी अध्यक्ष व लंगट सिंह महाविद्यालय शिक्षक संघ अध्यक्ष प्रो.जयकांत सिंह ‘जय’, पेंशनर समाज के उपाध्यक्ष प्रो.नवल किशोर शर्मा, विश्वविद्यालय विभाग शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो.सतीश कुमार राय, महासचिव प्रो.ललन कुमार झा, प्रो.राम कुमार, प्रो.रजनीश कुमार गुप्ता, रामदयालु सिंह महाविद्यालय शिक्षक संघ सचिव डॉ.एम.एन.रजवी, मंहथ दर्शन दास महिला महाविद्यालय की सचिव डॉ.रिंकू कुमारी, वैशाली महिला महाविद्यालय की डॉ.सोनी भूषण, आर.एन.कॉलेज, हाजीपुर शिक्षक संघ के सचिव डॉ.शशिभूषण कुमार, समता कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव डॉ.चन्द्रशेखर कुशवाहा, एल.एन.कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव डॉ.ईश्वरलाल, डॉ.मनोज कुमार सिंह, डॉ.रविरंजन कुमार, शिक्षकेत्तर कर्मचारी के प्रक्षेत्रीय संयुक्त सचिव इन्द्र कुमार दास, प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष व सचिव राजीव कुमार द्वय, श्याम किशोर सिंह आदि ने शिक्षक-कर्मचारियों की संयुक्त सभा को सम्बोधित किया।

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