बाबासाहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर की न्याय दृष्टि का मुख्य आधार सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की स्थापना करना था- प्रो.संजय पासवान, पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री
डॉ.अंबेडकर ने भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) और राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) के माध्यम से इन न्याय के आधारों को मजबूत किया- प्रो.दिनेश चंद्र राय, कुलपति

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, १४ अप्रैल
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय अंबेडकर आयोजन समिति के तत्वावधान में “डॉ.अंबेडकर की दृष्टि: न्याय व्यवस्था” पर विश्वविद्यालय सीनेट हॉल में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री प्रो.संजय पासवान ने कहा कि डॉ.अंबेडकर के विचार आज के समय में भी एक समावेशी और समतामूलक भारत के निर्माण के लिए अपरिहार्य हैं। प्रो.पासवान नें कहा की बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की न्याय दृष्टि का मुख्य आधार सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय की स्थापना करना था। उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित एक समावेशी समाज के निर्माण पर जोर दिया। उनके न्याय दर्शन का लक्ष्य जातिविहीन समाज और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना था। अंबेडकर सभी नागरिकों, विशेषकर दलितों और पिछड़ों के लिए, सामाजिक समानता और सम्मानजनक जीवन चाहते थे, जो जाति-आधारित भेदभाव से मुक्त हो। उनका मानना था कि आर्थिक संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए, जिससे वित्तीय असुरक्षा दूर हो और सभी को विकास के समान अवसर मिलें। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बीआरएबीयू के कुलपति प्रो.दिनेश चंद्र राय ने कहा कि डॉ.अंबेडकर ने भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) और राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) के माध्यम से इन न्याय के आधारों को मजबूत किया और देश के शासन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सभी वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना, जिसे उन्होंने संविधान के माध्यम से स्थापित किया विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्रों को अंबेडकर के विचार को अपनाते हुए इस जन-जन तक पहुंचाने का दायित्व निभाना चाहिए। कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए संकायाध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो.आलोक प्रताप सिंह ने डॉ.अंबेडकर के न्यायिक विचारों के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हर कहा की डॉ.अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान कानून के समक्ष समानता और मौलिक अधिकारों के माध्यम से न्याय की रक्षा करता है। कार्यक्रम में डॉ.सुकन पासवान प्रज्ञा चक्षु द्वारा लिखित किताब बुद्ध एवं अंबेडकर का लोकार्पण हुआ। डॉ.पासवान ने अंबेडकर और बुद्ध के दर्शन पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय कुलगीत से हुआ। इसके बाद कवि राम उचित पासवान ने स्वरचित अंबेडकर गीत को गाकर अंबेडकर की महिमा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत कुलसचिव डॉ.समीर कुमार शर्मा ने किया। मंच संचालन पूर्व उप-कुलसचिव उमाशंकर दास ने और धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ.विनोद बैठा ने किया मौके पर प्रॉक्टर डॉ.आर.के चौधरी, पूर्व कुलसचिव डॉ.विपिन कुमार राय, प्राचार्य डॉ.शशि भूषण कुमार, डॉ.रजनीश कुमार गुप्ता, डॉ.वीरेंद्र कुमार, डॉ.अमर बहादुर शुक्ला, डॉ.अमानुल्ला, डॉ.विजय कुमार, डॉ.वीरेंद्र चौधरी, डॉ.ललित किशोर, डॉ.सतीश कुमार, डॉ.अनिल धवन, डॉ.मुन्ना सिंह यादव समेत बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता गण उपस्थित थे।





