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2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए जीडीपी विकास दर को 7-8% पर बनाए रखना आवश्यक- प्रो.रामा शंकर दुबे, कुलाधिपति, NIEPA

देश के तासीर के अनुसार विकास को गढ़ने के लिए आर्थिक नीति में जनता की भागीदारी आवश्यक- प्रो.दिनेश चंद्र राय, कुलपति, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार

एमएसकेबी (MSKB) कॉलेज में आयोजित इकोनॉमिक एसोसिएशन ऑफ बिहार (EAB) के 23वें वार्षिक अधिवेशन का समापन हुआ। इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘विकसित भारत @ 2047: समावेशी और सतत विकास के लिए रोडमैप’ था। समापन समारोह में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA) के कुलाधिपति (चांसलर) प्रो.रामा शंकर दुबे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.दिनेश चंद्र राय ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो.दुबे ने ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारतीय विरासत (पारंपरिक ज्ञान) और आधुनिक नवाचार के मेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए जीडीपी विकास दर को 7-8% पर बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने सेवा, उद्योग और कृषि क्षेत्रों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। प्रो.दुबे ने रेखांकित किया कि देश की बढ़ती जीडीपी में सेवा, उद्योग और कृषि तीनों क्षेत्रों का समान महत्व है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.दिनेश चंद्र राय ने समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश के तासीर के अनुसार विकास को गढ़ने के लिए आर्थिक नीति में जनता की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विरासत को नवाचार के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। डॉ.राय ने कहा कि वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की 6.5% जीडीपी वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है। समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए आईइए के मुख्य संयोजक और ईएबी के संस्थापक सचिव डॉ.अनिल कुमार ठाकुर कहा की इस अधिवेशन का मुख्य विषय “विकसित भारत @ 2047: समावेशी और सतत विकास के लिए रोडमैप” था। इसमें देश के लगभग 200 अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। दो दिनों तक चले इस सत्र में करीब 200 शोध पत्र पढ़े गए और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और डॉ.ताराशंकर प्रसाद सिंह मेमोरियल लेक्चर जैसे विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। सम्मेलन के निष्कर्षों को सुझाव के रूप में सरकार को भेजा जाएगा। डॉ.ठाकुर नें कहा की इस 23वें अधिवेशन में प्रस्तुत शोध पत्रों और चर्चाओं के मुख्य निष्कर्ष मुख्य रूप से ‘विकसित भारत @ 2047’ के लिए पांच निर्धारित उप-विषयों (Themes) पर आधारित थे. जिसमें समावेशी विकास (Inclusive Growth): बिहार जैसे राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के विकास की रणनीतियों पर चर्चा की गई। मानव पूंजी और जनसांख्यिकीय लाभांश: 21वीं सदी के लिए कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में रेखांकित किया गया। सतत शहरीकरण और ग्रामीण परिवर्तन: स्मार्ट और लचीले शहरों के विकास के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और ग्रामीण-शहरी संपर्कों को मजबूत करने पर शोध प्रस्तुत किए गए। हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy): नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। समापन समारोह में स्वागत भाषण सम्मेलन के संयोजक डॉ.राकेश कुमार सिंह, विशेष संबोधन आईईए के महासचिव डॉ.रविंद्र के. ब्रह्मे, IEA संयोजक सम्बोधन डॉ.अंग्रेज सिंह राणा, ईएबी के उपाध्यक्ष प्रो.सत्येन्द्र प्रजापति, कोषाध्यक्ष, आईईए प्रो.के.एन. यादव, विशिष्ट अतिथि सह कुलसचिव प्रो.समीर कुमार शर्मा, विशिष्ट अतिथि सह पूर्व रजिस्ट्रार प्रो.संजय कुमार का सम्बोधन हुआ तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ.एस. नारायणन संयुक्त सचिव एवं मुख्य समन्वयक, आईईए द्वारा किया गया. इस अवसर पर ईएबी के सचिव डॉ.राजेश कुमार, बीआरएयू के कुलानुशासक प्रो.रवीन्द्र कुमार चौधरी, प्रो.बी.पी. चंद्रमोहन, डॉ.पूनम कुमारी, डॉ.कुमारी मनीषा, डॉ.बालाकान्त शर्मा, डॉ.ध्रुव कुमार सिंह, डॉ.दानिश सब्बीर, डॉ.अविनाश कुमार, डॉ.विकास कुमार शांडिल्य, डॉ.प्रदीप कुमार, डॉ.अनिल कुमार, डॉ.चिन्मय प्रकाश, डॉ.बिनोद कुमार दत्त, डॉ.अनीश चन्द्र मिश्रा सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित थें.  

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