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दुर्गा पूजा के मद्देनजर विधि-व्यवस्था संधारण एवं आवश्यक तैयारी की डीएम व एसपी ने की प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों की ब्रीफिंग

ध्रुव कुमार सिंह, सीतामढ़ी, बिहार, १५ अक्टूबर

जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया एवं  पुलिस अधीक्षक अमित रंजन  ने कहा है कि दुर्गा पूजा के अवसर पर उत्कृष्ट भीड़-प्रबंधन, सुगम यातायात तथा सुदृढ़ विधि-व्यवस्था संधारण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी पदाधिकारी इसके लिए सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहें। अधिकारीद्वय सीतामढ़ी समाहरणालय में दुर्गा पूजा के मद्देनजर विधि-व्यवस्था संधारण एवं आवश्यक तैयारी को लेकर आयोजित बैठक में प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। बैठक/ब्रीफिंग में जिला स्तरीय सभी वरीय पदाधिकारी सभी वरीय पुलिस पदाधिकारी,सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पदाधिकारीगण आसूचना तंत्र को सुदृढ़ एवं सक्रिय रखें तथा संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कतामूलक कार्रवाई करें। सभी एसडीओ एवं एसडीपीओ स्वयं भ्रमणशील रहें एवं क्षेत्र का जायजा लें। क्षेत्रीय पदाधिकारीगण सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से सार्थक संवाद कायम रखें। पूजा समितियों से निरंतर समन्वय बनाएँ रखें। शांति समिति की ससमय बैठक कर लें।  सभी अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में तैयारियों का पर्यवेक्षण करें। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को सतत क्रियाशील रखें। अफवाहों का त्वरित खंडन करें। पूर्व की घटनाओं में शामिल लोगों के विरूद्ध निरोधात्मक कार्रवाई करें। भीड़ की गतिविधियों पर सीसीटीवी से निगरानी करें।किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) एवं क्विक मेडिकल रिस्पांस टीम (क्यूएमआरटी) तैनात रखें। मद्य-निषेध अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करें। जिलाधिकारी एवं  पुलिस अधीक्षक ने पदाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि पर्व-त्योहार के अवसर पर सुदृढ़ प्रशासनिक तैयारी सुनिश्चित रहनी चाहिए। विधि-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। निदेश दिया गया कि सभी पदाधिकारी संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतेंगे तथा असामाजिक तत्वों के विरूद्ध निरोधात्मक एवं दण्डात्मक कार्रवाई करेंगे। कॉम्युनिकेशन प्लान सुनिश्चित कर विधि-व्यवस्था का संधारण करेंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि पूजा स्थलों पर महिलाओं एवं पुरूषों के लिए अलग-अलग पंक्ति रहना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को भी कोई समस्या न हो तथा भीड़ प्रबंधन एवं विधि-व्यवस्था संधारण भी सुगमता से किया जा सके। सभी संबंधित पदाधिकारी पूजा समितियों से समन्वय कर इसे सुनिश्चित करेंगे। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निदेश देते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग के गाईडलाईन के अनुसार पूजा पंडालों का निर्माण एवं संचालन सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है। आयोजकों के द्वारा पंडालों के पास सीसीटीवी/वीडियोग्राफी की व्यवस्था रहेगी। आयोजकों द्वारा अग्निशमन की ठोस व्यवस्था किया जाना अनिवार्य है। सभी पूजा पंडालों में प्रावधान के अनुसार विद्युत कनेक्शन की व्यवस्था सुनिश्चित रहनी चाहिए, भीड़ प्रबंधन हेतु लाउडस्पीकर की समुचित व्यवस्था रहनी चाहिए, आपत्तिजनक स्लोगन, कार्टून इत्यादि पर रोक है। डीजे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। 10:00 बजे रात्रि के बाद एवं 6:00 बजे सुबह तक लाउडस्पीकर नहीं बजेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि दुर्गा पूजा में विभिन्न मंदिरों तथा सावर्जनिक दुर्गा पूजन स्थलों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होने की संभावना रहती है। अनेक स्थानों पर रावण-वध कार्यक्रम होता है। अतः सतर्कता के साथ तैयारी सुनिश्चित करनी होगी। सभी अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी तथा पुलिस पदाधिकारी भीड़ प्रबंधन के मानकों का दृढ़ता के साथ परन्तु विनम्रतापूर्वक अनुपालन कराएंगे। गश्ती दल द्वारा रेगुलर पेट्रोलिंग की जाए। नियंत्रण कक्ष से भीड़ पर निगरानी रखी जाए। सीसीटीवी कैमरा एवं वीडियोग्राफी के माध्यम से अनुश्रवण किया जाए।यथेष्ट प्रशासनिक सतर्कता, यथोचित निगरानी तथा सुरक्षामूलक कार्रवाई करें। जिला जनसम्पर्क अधिकारी कमल सिंह नें बताया  कि दुर्गा पूजा के आयोजन के क्रम में जनहित एवं आम जनता की व्यापक सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक दिशा-निर्देश दुर्गापूजा के आयोजकों/व्यवस्थापकों को दिये गये की पूजा पंडाल में विधिवत विद्युत सम्बद्धता अवश्य लें एवं पंडाल का निर्माण विद्युत तारों से सुरक्षित दूरी पर ही करें जिसे विद्युत अधिनियमों का उल्लंघन नहीं हो। पंडालों की मजबूती का विधिवत जाँच करायी जाए। पूजा पंडाल के निर्माण में अग्नि सुरक्षा नियमों एवं मानकों का अनुपालन किया जाए। पंडाल निर्माण के संबंध में सड़क, जलापूर्ति निकासी, टेलीफोन, बिजली के केबुल तथा सरकारी एवं  लोक सम्पत्ति को क्षति न पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाय। पंडाल निर्माण के क्रम में इस बात का ध्यान रखा जाय कि यातायात व्यवस्था प्रतिकूल ढंग से प्रभावित नहीं हो। वाहनों का परिचालन सजावटों के कारण प्रभावित न हो। ध्वनि प्रदूषण यथा लाउडस्पीकर के संबंध में नियमों का अनुपालन किया जाय। जिलाधिकारी ने कहा कि जनहित में ऐसा किया जाना आवश्यक है तथा इसकी अनुपालन न होने की स्थिति में सभी क्षतियों एवं परिणामों की जिम्मेवारी आयोजकों/व्यवस्थापकों/समितियों की होगी। किसी भी प्रकार के अफवाह से बचने तथा सोशल मीडिया पर भी अफवाहों से बचने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ही माईकिंग भी कराया जाय। अफवाह फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के विरूद्ध सुसंगत धाराओं के अंतर्गत नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे। आपतिजनक स्लोगन, कार्टून इत्यादि पर रोक है। इसे सभी पदाधिकारी सख्ती से सुनिश्चित करेंगे। जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारियों को नावों का निबंधन, नावों की संख्या, प्रशिक्षित गोताखोरों की संख्या, कार्यरत नाविकों की संख्या आदि बिन्दुओं की सूक्ष्म समीक्षा संबंधित पदाधिकारियों के साथ कर लेने का निदेश दिया। सुरक्षा के दृष्टिकोण से एवं दुर्घटना से बचाव हेतु त्योहारों के अवसर पर निजी नावों के परिचालन-परिवहन सुरक्षा हेतु बिहार आदर्श नौका अधिनियम, 1985 के तहत नियंत्रणात्मक विधियों को लागू करने का निदेश दिया गया। विसर्जन के दिन नदी में बिना अनुमति के नाव परिचालन पर रोक रहेगी। दुर्गापूजा के अवसर पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। विद्युत कार्यपालक अभियंता क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। पुलिस उपाधीक्षक, यातायात उत्कृष्ट यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे। दुर्गापूजा के अवसर पर आकस्मिक स्थिति से निपटने हेतु डॉक्टर, पारा मेडिकल स्टाफ एवं आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं के साथ एम्बुलेंस सिविल सर्जन प्रतिनियुक्त करेंगे। जिला अग्निशमन पदाधिकारी को निर्देशित किया गया कि दुर्गापूजा के अवसर पर आकस्मिक स्थिति से निपटने हेतु  फायर दस्ता  प्रतिनियुक्त करना सुनिश्चित करेंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी पदाधिकारियों को सजग, सतर्क एवं सक्रिय रहने की आवश्यकता है। नियंत्रण कक्ष:–06226–250316,250317,250318 विधि व्यवस्था संधारण के मद्देनजर थाना बार पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारियों के साथ सशस्त्र बलों की प्रतिनियुक्ति की गई है।

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