सहायक प्राध्यापक बहाली की नई नियमावली के विरोध में अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी

ध्रुव कुमार सिंह, पटना, बिहार, ०६ अगस्त
बिहार में सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) की नई नियुक्ति प्रक्रिया और नियमावली के विरोध में शोधार्थियों व अभ्यर्थियों का आमरण अनशन पटना के गर्दनीबाग में चल रहा है। अभ्यर्थी नई परीक्षा प्रणाली को हटाने, पुरानी व्यवस्था के तहत बहाली करने और डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थी नई लिखित परीक्षा प्रणाली के बजाय पुरानी प्रक्रिया से ही नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। बिहार में स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए डोमिसाइल नीति लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार द्वारा लाई गई नई व्यवस्था में 175 अंकों की लिखित परीक्षा और 25 अंकों का इंटरव्यू (टीचिंग स्किल टेस्ट सहित) का प्रावधान किया गया है, जिसका विरोध हो रहा है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत हित का नहीं, बल्कि बिहार के हजारों शोधार्थियों, पीएचडी धारकों तथा उच्च शिक्षा के सम्मान, अधिकार और भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। भूख हड़ताल पर बैठे संयोजक कुमुद पटेल के साथ अभिषेक मेहता, बिक्कु सिंह प्रधान, डॉ.रवि सिंह ने कहा कि वर्षों की कठिन मेहनत, शोध और शैक्षणिक उपलब्धियों की अनदेखी करते हुए बनाई गई नई बहाली नियमावली ने हजारों योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। सरकार के समक्ष ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और शांतिपूर्ण वार्ता सहित सभी लोकतांत्रिक माध्यमों से लगातार अपनी मांगें रखी गईं, किंतु अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसी कारण अभ्यर्थियों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आमरण अनशन का मार्ग अपनाना पड़ा। अनशनकारीयों की प्रमुख मांगें हैं—सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulations के प्रावधानों को लागू किया जाए, अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष निर्धारित की जाए, पीएचडी को अनिवार्य योग्यता बनाया जाए, सभी विषयों में नियमित बहाली की जाए, डोमिसाइल नीति लागू की जाए तथा महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए। शोधार्थियों व अभ्यर्थियों नें सरकार से आग्रह किया कि वह अभ्यर्थियों की न्यायोचित मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय ले। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र पहल नहीं की, तो यह आंदोलन पूरे बिहार में और अधिक व्यापक रूप धारण करेगा।





