डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा जागरूकता की बढ़ती आवश्यकता, डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर खतरों से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी
साइबर सुरक्षा पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए जिलाधिकारी

साइबर सुरक्षा पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए जिलाधिकारी
ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, १३ मार्च
आज के तेजी से विकसित होते डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा जैसे संवेदनशील एवं ज्वलंत विषय पर एमआईटी में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के द्वारा किया गया। प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने आज के बदलते परिवेश में डिजिटल सामग्री की उपयोगिता, प्रासंगिकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट, स्मार्टफोन, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग ने लोगों के जीवन को काफी आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों की घटनाओं में भी तेजी से वृद्धि हुई है। ऐसे में आम नागरिकों, सरकारी अधिकारियों तथा विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना समय की बड़ी आवश्यकता बन गई है। इसी उद्देश्य से विभिन्न संस्थानों और विभागों द्वारा साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना है। प्रशिक्षण सत्र में अवगत कराया गया कि साइबर सुरक्षा का अर्थ कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क, मोबाइल उपकरणों और डिजिटल डाटा को विभिन्न प्रकार के साइबर हमलों से सुरक्षित रखना है। इसमें हैकिंग, वायरस, मैलवेयर, फिशिंग, डाटा चोरी और अन्य ऑनलाइन हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। साइबर सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य डिजिटल जानकारी की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता को बनाए रखना होता है। इसके साथ ही साइबर जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। साइबर जागरूकता का मतलब है इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते समय संभावित खतरों को समझना और उनसे बचने के उपायों की जानकारी रखना। इसमें फर्जी ई-मेल, फिशिंग लिंक, नकली वेबसाइट, सोशल मीडिया धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी और अन्य डिजिटल अपराधों की पहचान करना शामिल है। जब उपयोगकर्ता इन खतरों के बारे में जागरूक होते हैं तो वे आसानी से ऐसे धोखाधड़ी के प्रयासों से बच सकते हैं। साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों में डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की आदत विकसित करना है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को साइबर खतरों और हमलों के प्रकारों के बारे में जानकारी दी जाती है। साथ ही उन्हें सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, डिजिटल भुगतान के सुरक्षित तरीके, फिशिंग ई-मेल की पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों के बारे में भी प्रशिक्षित किया जाता है। इसके अलावा प्रतिभागियों को सोशल मीडिया और ई-मेल के सुरक्षित उपयोग के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी जाती है। कई बार लोग अनजाने में अपनी व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर देते हैं, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठा सकते हैं। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान लोगों को यह भी बताया जाता है कि किस प्रकार सोशल मीडिया का सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग किया जाए। साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण विशेष रूप से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है। आज अधिकांश सरकारी कार्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित हो रहे हैं और इनमें बड़ी मात्रा में संवेदनशील डाटा का उपयोग होता है। ऐसे में यदि अधिकारी और कर्मचारी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे तो वे न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे, बल्कि सरकारी डाटा और सिस्टम की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकेंगे। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाता है। प्रशिक्षण के पहले चरण में साइबर सुरक्षा की मूल अवधारणा और विभिन्न प्रकार के साइबर हमलों की जानकारी दी जाती है। इसमें वायरस, मैलवेयर और एंटीवायरस के महत्व को भी समझाया जाता है ताकि उपयोगकर्ता अपने कंप्यूटर और मोबाइल उपकरणों को सुरक्षित रख सकें। प्रशिक्षण के दूसरे चरण में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग पर विशेष जोर दिया जाता है। इसमें ई-मेल सुरक्षा, सोशल मीडिया सुरक्षा, सुरक्षित ब्राउजिंग, फिशिंग से बचाव, सुरक्षित ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल भुगतान के सुरक्षित तरीकों के बारे में विस्तार से बताया जाता है। साथ ही मजबूत पासवर्ड बनाने की तकनीक और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के महत्व को भी समझाया जाता है, जिससे डिजिटल खातों की सुरक्षा और मजबूत हो सके। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण में कंप्यूटर सिस्टम और ऑपरेटिंग सिस्टम सुरक्षा से संबंधित विषयों को भी शामिल किया जाता है। इसमें विंडोज और लिनक्स जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम की बुनियादी जानकारी, सिस्टम अपडेट, फायरवॉल सेटिंग्स, एंटीवायरस उपयोग और यूजर परमिशन जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी जाती है। इससे उपयोगकर्ता अपने सिस्टम को संभावित साइबर खतरों से बेहतर तरीके से सुरक्षित रख सकते हैं।साइबर कानून और ऑनलाइन धोखाधड़ी भी इस प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसमें भारत में लागू साइबर कानूनों, बैंकिंग फ्रॉड, पहचान चोरी, नौकरी से जुड़े ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध की रिपोर्टिंग प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाती है। प्रतिभागियों को यह भी बताया जाता है कि यदि वे किसी साइबर अपराध के शिकार हो जाते हैं तो उसे किस प्रकार संबंधित एजेंसियों को रिपोर्ट किया जाए। विशेषज्ञों ने अवगत कराया कि आज लगभग हर व्यक्ति इंटरनेट और स्मार्टफोन का उपयोग कर रहा है। ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने लोगों की जिंदगी को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधियों के लिए लोगों को ठगना भी आसान हो गया है। कई बार लोग जागरूकता की कमी के कारण फर्जी कॉल, संदेश या लिंक के झांसे में आ जाते हैं और आर्थिक नुकसान का सामना करते हैं। यदि लोगों में साइबर जागरूकता बढ़े तो वे ऐसे धोखाधड़ी के प्रयासों को आसानी से पहचान सकते हैं और उनसे बच सकते हैं। साइबर सुरक्षा केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और देश की डिजिटल सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ विषय है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान और डिजिटल साक्षरता से जुड़ी पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यदि नागरिक, संस्थान और सरकारी तंत्र मिलकर साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दें, तो एक सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।





