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स्वास्थ्य व आईसीडीएस की व्यापक समीक्षा: संस्थागत प्रसव, टीकाकरण और पोषण पर जिलाधिकारी के सख्त निर्देश

मुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रशासन की कड़ी नजर: लापरवाही पर कार्रवाई, गुणवत्ता सुधार पर जोर, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और कुपोषण उन्मूलन को नई गति: एनआरसी, टीकाकरण व एनक्वास पर फोकस

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, १२ जनवरी

स्वास्थ्य सेवाओं एवं महिला-बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी तथा परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में मुजफ्फरपुर समाहरणालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग एवं आईसीडीएस के प्रबंधन, संचालन एवं कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक की गई। बैठक में उप-विकास आयुक्त श्रेष्ठ अनुपम, सिविल सर्जन डॉ.अजय कुमार, सदर अस्पताल अधीक्षक, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, डीपीओ आईसीडीएस, जिला जनसम्पर्क अधिकारी प्रमोद कुमार सहित सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीपीएम, बीसीएम एवं अन्य संबंधित अधिकारी-कर्मी उपस्थित थे। बैठक में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, पोषण पुनर्वास केंद्र, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन, दवा वितरण, सर्वजन दवा सेवन अभियान तथा एनक्वास प्रमाणन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सुलभ, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रखंड में प्रशिक्षित डॉक्टर एवं नर्स की उपलब्धता के माध्यम से संस्थागत प्रसव की व्यवस्था हर हाल में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव न केवल मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करता है, बल्कि जटिलताओं के समय समय पर उपचार भी संभव बनाता है। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दिसंबर माह में पूरे जिले में कुल 5834 संस्थागत प्रसव कराए गए। इस पर जिलाधिकारी ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस संख्या को और बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। बैठक में औराई प्रखंड में कार्यों की खराब स्थिति पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने वहां के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक (बीपीएम) एवं बीसीएम का वेतन स्थगित करने का निर्देश दिया। वहीं मुसहरी, बोचहा, औराई तथा कटरा के प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया। जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सिविल सर्जन एवं डीपीएम को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र भ्रमण कर प्रत्येक प्रखंड के अंतर्गत न्यूनतम तीन स्वास्थ्य उपकेंद्रों में संस्थागत प्रसव को क्रियाशील रखें, ताकि गांव की गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं को उनके गांव के निकट ही सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिल सके। इसके साथ ही सी-सेक्शन एवं जेनरल सर्जरी के मामलों में खराब प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों से भी स्पष्टीकरण करने के निर्देश दिए गए। बैठक में सिविल सर्जन द्वारा अवगत कराया गया कि महिलाओं से समन्वय स्थापित कर सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए प्रति प्रसव ममता कार्यकर्ता को ₹600 प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके लिए सरकार द्वारा ₹2 करोड़ का आवंटन प्राप्त हुआ है, जिसमें से ₹1 करोड़ 80 लाख का उपावंटन अस्पतालों को कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने इस राशि के पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग के निर्देश दिए। टीकाकरण की समीक्षा करते हुए पाया गया कि दिसंबर माह में 95% उपलब्धि के साथ 11,811 बच्चों का टीकाकरण किया गया। वहीं अप्रैल से दिसंबर तक कुल 1,05,712 बच्चों का टीकाकरण हुआ है। जिलाधिकारी ने सभी प्रखंडों को 100% उपलब्धि हासिल करने का टास्क दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि जिले के स्लम एरिया, माइग्रेंट मजदूर, रिक्शा चालक, फुटपाथ पर रहने वाले तथा अन्य गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को विशेष रूप से फोकस कर उनके बच्चों को टीकाकरण से आच्छादित किया जाए, ताकि अभियान के दौरान कोई भी बच्चा छूट न जाए साथ ही जिलाधिकारी ने आम जनता से अपील की कि वे अपने बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर अवश्य कराएं। गर्भवती महिलाओं के प्रसव-पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को आवश्यक सुधार लाने का निर्देश दिया। इसके लिए हर गांव में ममता  एवं आशा कार्यकर्ता को सक्रिय करने तथा गर्भवती महिलाओं से समन्वय स्थापित कर प्रसव पूर्व जांच एवं संस्थागत प्रसव के बारे में जानकारी तथा उचित उपचार करने का निर्देश दिया।उन्होंने आयरन एवं कैल्शियम टैबलेट के वितरण के लिए पर्याप्त संख्या में टीम गठित करने तथा सुचारू वितरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया, ताकि एनीमिया जैसी समस्याओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। बैठक में पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की भी विस्तार से समीक्षा की गई। दिसंबर माह में कुल 22 बच्चों को एनआरसी भेजा गया। इस पर जिलाधिकारी ने मोतीपुर, मुरौल एवं साहेबगंज के बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपनी कार्य संस्कृति में सुधार लाते हुए प्रति माह न्यूनतम पांच बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि मुजफ्फरपुर जिले में कुपोषण के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के रूप में संचालित एनआरसी गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से पीड़ित बच्चों के उपचार, देखभाल एवं पुनर्वास में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य पदाधिकारियों, आईसीडीएस, आशा एवं आंगनवाड़ी कर्मियों को निर्देश दिया कि कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान, उपचार एवं फॉलो-अप में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने एनआरसी में 24×7 चिकित्सकीय सुविधा, स्वच्छ आवास, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता एवं संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था सख्ती से बनाए रखने के निर्देश दिए। भर्ती बच्चों की प्रारंभिक जांच, वजन, ऊंचाई एवं एमयूएसी के आधार पर नियमित स्वास्थ्य आकलन, दस्त, निमोनिया, एनीमिया जैसी बीमारियों का समयबद्ध उपचार, टीकाकरण, विटामिन-मिनरल सप्लीमेंटेशन एवं दवा वितरण में शत-प्रतिशत अनुपालन पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों के पोषण सुधार के लिए आयु के अनुसार संतुलित एवं उच्च कैलोरी युक्त आहार तथा स्थानीय पोषक भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही माताओं एवं अभिभावकों को स्तनपान, अनुपूरक आहार, स्वच्छता एवं घरेलू स्तर पर पौष्टिक भोजन तैयार करने का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि बच्चे एनआरसी से डिस्चार्ज होने के बाद भी स्वस्थ रह सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि एनआरसी से डिस्चार्ज हुए बच्चों का आंगनवाड़ी एवं आशा के माध्यम से नियमित फॉलो-अप किया जाए और वजन वृद्धि की सतत निगरानी हो। मीनापुर परियोजना के हर इंडिकेटर पर पिछड़ने एवं खराब प्रदर्शन के आधार पर जिलाधिकारी ने मीनापुर के सीडीपीओ के विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा करने का निर्देश दिया। वहीं परवरिश योजना में खराब प्रदर्शन एवं बैठक से अनुपस्थित रहने के कारण मुरौल के सीडीपीओ का वेतन स्थगित कर स्पष्टीकरण तलब किया गया। पोषाहार वितरण की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने मीनापुर, पारु, कुढ़नी, गायघाट एवं कटरा के सीडीपीओ को आवश्यक सुधार लाने का निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि सर्वजन दवा सेवन अभियान के तहत 2 वर्ष से ऊपर सभी व्यक्तियों को फाइलेरिया की दवा दी जा रही है। यह अभियान 10 फरवरी से शुरू है जो 17 दिनों तक चलेगा। जिलाधिकारी ने अभियान को सफल बनाने के लिए कार्य योजना तैयार करने, टीम गठन करने तथा पर्याप्त मात्रा में दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। दवा खिलाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि यह दवा 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को नहीं दी जानी है। दवा खाली पेट नहीं खिलानी है तथा दवा खाने के बाद एक गिलास पानी पीना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने आशा कार्यकर्ता, अन्य स्वास्थ्य कर्मियों, शिक्षा विभाग, आईसीडीएस, जीविका, आपूर्ति विभाग एवं नगर निकायों को आपसी समन्वय बनाकर सक्रिय एवं तत्पर होकर अभियान को सफल बनाने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी बताया गया कि मुजफ्फरपुर जिले में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) के अंतर्गत चार स्वास्थ्य केंद्रों को गुणवत्ता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। यह प्रमाणन साफ-सफाई, मरीजों की सुरक्षा, दवा एवं उपकरणों की उपलब्धता, संक्रमण नियंत्रण, रिकॉर्ड प्रबंधन, स्टाफ दक्षता एवं मरीज संतुष्टि जैसे मानकों पर आधारित होता है। एनक्वास प्रमाणन प्राप्त करने वाले स्वास्थ्य केंद्रों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बिशुनपुर (बंदरा), रेपुरा (मीनापुर), नरौलीडीह (मुसहरी) तथा पिलखी गजपट्टी (मुरौल) शामिल हैं। जिलाधिकारी ने इसे जिले के लिए गर्व की बात बताते हुए कहा कि इससे आमजन का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर और मजबूत होगा। उन्होंने निर्देश दिया कि जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को भी एनक्वास मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी योजनाएं सीधे आमजन के जीवन से जुड़ी हैं। इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही स्वस्थ समाज की नींव रखता है। सभी अधिकारी पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें, ताकि मुजफ्फरपुर को स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बनाया जा सके।

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