केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री द्वारा ‘जोश’ (JOSH – Joint Squad for Health: Together for a TB-Mukt Bharat) टीमों का किया गया राष्ट्रीय शुभारंभ

ध्रुव कुमार सिंह, सीतामढ़ी, बिहार, ०८ अक्टूबर
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री द्वारा ‘जोश’ (JOSH – Joint Squad for Health: Together for a TB-Mukt Bharat) टीमों का राष्ट्रीय शुभारंभ किया गया। इसका उद्देश्य टीबी (तपेदिक) के खिलाफ लड़ाई में सामुदायिक भागीदारी और युवा शक्ति को मजबूत करना है। जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए 11 राज्यों के 55 जिलों में इन टीमों को तैनात किया गया है। इसमें MY भारत के स्वयंसेवक, एनसीसी (NCC) के कैडेट्स और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत लॉन्च की गई ‘जोश’ (JOSH – Joint Squad for Health) पहल में सीतामढ़ी जिला बिहार के उन चुनिंदा जिलों में शामिल है, जहां प्रथम चरण में इस विशेष अभियान को धरातल पर उतारा जा रहा है। जिले में इस अभियान को पूरी गंभीरता से लागू करने के लिए जिला मुख्यालय पर हाइब्रिड मोड में आयोजित इस बैठक में पूरा शीर्ष नेतृत्व मौजूद था. जिला पदाधिकारी (DM), तनय सुल्तानिया, सिविल सर्जन (CS) डॉ. रविंद्र कुमार यादव और जिला यक्ष्मा पदाधिकारी (DTO) डॉ. ज़ेड जावेद मुख्य रूप से जुड़े रहे ताकि जमीनी स्तर पर टीमों के गठन और कामकाज की सीधी निगरानी की जा सके। जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC), जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM), जिला लेखा प्रबंधक (DAM), जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीसी (DPC) और वरीय यक्ष्मा पर्यवेक्षक (STS) जुड़े, जो प्रखंड (Block) स्तर पर इसकी दैनिक रिपोर्टिंग संभालेंगे। इस अभियान का पूरा दारोमदार स्वास्थ्य विभाग के अलावा जिले के युवाओं पर है. माय भारत वॉलिंटियर्स और एनसीसी कैडेट्स: सीतामढ़ी के एनसीसी कमांडेंट और जिला युवा अधिकारी की देखरेख में जिले के MY Bharat वॉलिंटियर्स और NCC कैडेट्स को ‘जोश टीम’ के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह टीमें जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य केंद्रों से दूर रह रहे लोगों के बीच सीधे संपर्क करेंगी। जोश टीमें गांवों में जाकर लगातार खांसी, बलगम में खून आना, बुखार या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षणों वाले संभावित मरीजों की पहचान करेंगी और उन्हें नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में जांच के लिए प्रेरित करेंगी। टीबी मरीजों को 6 से 9 महीने का नियमित उपचार पूरा करने और उनके संपर्क में रहने वाले संवेदनशील लोगों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) दिलाने के बारे में जागरूक किया जाएगा। सीतामढ़ी जिले में पहले से चल रहे पोषण कार्यक्रम (फूड बास्केट वितरण) को इन टीमों के आने से और गति मिलेगी, जिससे मरीजों को निक्षय मित्र योजना से जोड़कर सामाजिक सहायता दी जा सके। ग्रामीण इलाकों में टीबी को लेकर छुपे सामाजिक संकोच या भेदभाव को खत्म करना इन युवा कैडेट्स का मुख्य उद्देश्य होगा। जिला जनसम्पर्क अधिकारी कमल सिंह नें बताया की सीतामढ़ी में स्वास्थ्य विभाग, रक्षा नेटवर्क (NCC) और युवा कार्य विभाग के इस त्रिकोणीय समन्वय (Whole-of-Society Approach) के जरिए जिले को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।





