बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में व्याप्त शैक्षणिक अराजकता, फीस वृद्धि और भ्रष्टाचार के खिलाफ ऑॉल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (AIDSO) ने किया विरोध प्रदर्शन

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, १६ अक्टूबर
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में व्याप्त शैक्षणिक अराजकता, फीस वृद्धि और भ्रष्टाचार के खिलाफ ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (AIDSO) ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार लचर नीतियों के जरिए विद्यार्थियों की शिक्षण व्यवस्था और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। AIDSO कार्यकर्ताओं और सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने लंगट सिंह (एलएस) कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन तक एक विरोध मार्च निकाला और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों के शिष्टमंडल ने डीएसडब्ल्यू (DSW) प्रो. आलोक प्रताप सिंह से मिलकर अपनी 12 सूत्री माँगें सौंपीं। इसमें बढ़ी हुई फीस को तुरंत वापस लेने, रिजल्ट में लगातार हो रही गड़बड़ियों को सुधारने और छात्र संघ चुनाव कराने जैसी मांगें प्रमुख हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि जहां एक तरफ पटना विश्वविद्यालय और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय जैसी जगहों पर छात्राओं और SC/ST छात्रों को मुफ्त शिक्षा का लाभ मिल रहा है, वहीं BRABU प्रशासन पिछले कई वर्षों से छात्रों को इस अधिकार से वंचित रखे हुए है। AIDSO के राज्य सचिव पवन कुमार और शिव कुमार तथा अन्य पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (CBCS) के नाम पर छात्रों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। कंपनियों द्वारा छात्रों को इंटर्नशिप में स्टाइपेंड दिए जाने के बजाय, यहां उल्टे छात्रों से ही पैसे वसूले जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परिणाम में भारी त्रुटियों और अपने ही अंकपत्र (मार्क्सशीट) व डिग्री सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए छात्रों को महीनों तक विश्वविद्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उनका समय, पैसा और मानसिक शांति नष्ट होती है। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन गंभीर समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान नहीं किया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाया जाएगा। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (AIDSO) के उग्र प्रदर्शन के बाद, छात्रों के 12 सूत्री मांग पत्र पर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र कल्याण अध्यक्ष (DSW) प्रो. आलोक प्रताप सिंह का रुख सकारात्मक रहा. प्रशासनिक भवन पर छात्रों के भारी दबाव को देखते हुए DSW ने छात्र शिष्टमंडल को वार्ता के लिए बुलाया और विभिन्न मांगों पर निम्नलिखित लिखित व मौखिक आश्वासन दिए. DSW ने छात्रों को आश्वस्त किया कि चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (CBCS) के तहत बढ़ी हुई फीस के मामले को विश्वविद्यालय की आगामी उच्च स्तरीय कमेटी और सिंडिकेट की बैठक में रखा जाएगा। इसके अलावा, छात्राओं और SC/ST छात्रों को अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर पूर्णतः निःशुल्क शिक्षा का लाभ देने के तकनीकी पहलुओं की जांच कर राज्य सरकार को भी इस संबंध में रिपोर्ट भेजी जाएगी। लगातार हो रही तकनीकी गड़बड़ियों और पेंडिंग रिजल्ट को लेकर DSW ने माना कि छात्रों को परेशानी हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय का आईटी सेल (UMIS) एक विशेष अभियान चलाकर लंबित पड़े अंकपत्र (Marksheet) और डिग्री प्रमाणपत्रों की त्रुटियों को 15 से 30 दिनों के भीतर सुधारेगा, ताकि छात्रों को विश्वविद्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के नाम पर कॉलेजों या बाहरी एजेंसियों द्वारा इंटर्नशिप के लिए छात्रों से पैसे वसूले जाने के गंभीर आरोप पर DSW ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सभी संबद्ध कॉलेजों को दिशा-निर्देश जारी करेगा कि छात्रों से कोई भी अतिरिक्त या अवैध शुल्क न लिया जाए। यदि कोई कॉलेज दोषी पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई होगी। प्रशासन की ओर से कहा गया कि पिछड़े सत्रों को समय पर लाने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं (Extra Classes) चलाई जा रही हैं और राजभवन के दिशा-निर्देशों के अनुसार परीक्षाओं का कैलेंडर तैयार किया जा रहा है। कॉलेजों में लाइब्रेरी, लैब और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए प्राचार्यों (Principals) को फंड का सही इस्तेमाल करने की सख्त हिदायत दी जाएगी। लोकतांत्रिक माहौल और छात्र संघ चुनाव कराने की मांग पर DSW ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव कराने के पक्ष में है। जैसे ही परीक्षाओं का वर्तमान व्यस्त शेड्यूल सामान्य होता है और राजभवन से आवश्यक अनुमति व दिशा-निर्देश प्राप्त होते हैं, चुनाव प्रक्रिया को लेकर आगे का कार्यक्रम तय किया जाएगा। कुलपति कार्यालय की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के शैक्षणिक हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। राजभवन और बिहार सरकार के नियमों के दायरे में आने वाली सभी जायज मांगों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन और DSW के इन आश्वासनों के बाद AIDSO के छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे केवल वादों से संतुष्ट नहीं होंगे। यदि तय समय सीमा के भीतर इन आश्वासनों पर जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ, तो छात्र संगठन पूरे मुजफ्फरपुर और BRABU के अंतर्गत आने वाले सभी कॉलेजों में तालाबंदी और अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाने को विवश होगा।





