विभागीय जांच में आरोप साबित होने और SSP की अनुशंसा के बाद DIG ने भ्रष्टाचार में संलिप्त पुलिस अवर निरीक्षक सदरे आलम को सेवा से किया बर्खास्त
यह कार्रवाई पुलिस विभाग में अनैतिक आचरण और रिश्वतखोरी के खिलाफ कड़े रुख का संकेत, पुलिस की ऐसी कार्रवाई जनता का विश्वास बहाल करने के लिए जरूरी - चंदन कुमार कुशवाहा, पुलिस उप-महानिरीक्षक

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ०२ अप्रैल
शिकायतकर्त्ता (परिवादिनी) तब्बसुम आरा, पति-मो.फारूक आजम, ग्राम-सिपाहपुर, थाना-अहियापुर, जिला- मुजफ्फरपुर द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना में दर्ज कराये गये शिकायत के आलोक में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना का प्राप्त शिकायत का सत्यापन किया गया। सत्यापनोपरांत परिवादी द्वारा भ्रष्टाचार का लगाये गये आरोपों को सही पाया गया। तदोपरांत निगरानी थाना कांड संख्या – 04/21, दिनांक – 29.09.2021, धारा- 7 (ए) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम, 2018) विरूद्ध पु०अ०नि० सदरे आलम, अहियापुर थाना (सम्प्रति-वैशाली जिला) के निगरानी थाना में प्राथमिकी दर्ज किया गया। तदालोक में दिनांक – 30.09.2021 को निगरानी धावा दल द्वारा अहियापुर थाना के सामनें स्थित चाय दुकान से 11,000/ रूपये परिवादिनी से रिश्वत लेते हुए पु०अ०नि० सदरे आलम को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। उक्त आरोप के लिए पु०अ०नि० सदरे आलम के विरूद्ध मुजफ्फरपुर जिला विभागीय जाँच (कार्यवाही) सं0-117/21 परिवर्तित 45/23 प्रारंभ किया गया, जिसके संचालन पदाधिकारी के रूप में पुलिस उपाधीक्षक (पूर्वी), मुजफ्फरपुर को नियुक्त किया गया। संचिका के संचालनोपरांत शहरियार अख्तर अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी), मुजफ्फरपुर सह-संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोप के लिए पु०अ०नि० सदरे आलम, अहियापुर थाना (सम्प्रति-वैशाली जिला) को दोषी होने का मंतव्य समर्पित किया गया जिसके आलोक में वरीय पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर द्वारा जाँच प्राधिकार के मंतव्य से सहमत होते हुए दण्ड अधिरोपण हेतु संचिका पुलिस उप-महानिरीक्षक, तिरहुत क्षेत्र, मुजफ्फरपुर को प्रतिवेदित की गई। उक्त आरोप की गहन समीक्षोपरांत जाँच प्राधिकार के मंतव्य से सहमत होते हुए भ्रष्टाचार में संलिप्त पु०अ०नि० सदरे आलम को सेवा से बर्खास्त किया गया है। पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG), तिरहुत रेंज चंदन कुमार कुशवाहा, (भा.पु.से.) नें कहा की पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है, ऐसे में भ्रष्टाचार में संलिप्त पुलिस पदाधिकारी/पुलिस कर्मी के विभाग में बने रहने से आमजन के साथ-साथ संगठन के अन्य पुलिस कर्मियों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ऐसे भ्रष्ट पुलिस पदाधिकारी का पुलिस विभाग में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।




