मातृ एनीमिया नियंत्रण की दिशा में ऐतिहासिक पहल, गर्भवती महिलाओं को Ferric Carboxymaltose (FCM) इंजेक्शन दिया गया
सीतामढ़ी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सुरसंड में कार्यक्रम का सफल आयोजन

ध्रुव कुमार सिंह, सीतामढ़ी, बिहार, २७ मार्च
मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और गंभीर एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं को समय पर प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस क्रम में Ferric Carboxymaltose (FCM) इंजेक्शन की शुरुआत बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान की गई। बिहार में मातृ एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती रही है, जिसके समाधान के लिए पिरामल फाउंडेशन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग, रणनीतिक योजना एवं जमीनी स्तर पर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिरामल फाउंडेशन द्वारा राज्य से लेकर जिला स्तर तक लगातार संवाद एवं कार्ययोजना के माध्यम से इस पहल को धरातल पर उतारने में अहम योगदान दिया गया। इसी पहल के तहत राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, पटना के निर्देशानुसार सीतामढ़ी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सुरसंड में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। सिविल सर्जन डॉ.अखिलेश कुमार के नेतृत्व में तथा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ.रामकिशोर सिंह के मार्गदर्शन में गंभीर एनीमिया से ग्रसित कुल 22 गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें FCM इंजेक्शन चढ़ाया गया। इस दौरान प्रशिक्षित GNM मनमोहन व्यास द्वारा सुरक्षित एवं मानक प्रोटोकॉल के अनुसार सभी चयनित गर्भवती महिलाओं को FCM इंजेक्शन दिया गया, जिससे उपचार की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी। इस कार्यक्रम की सफलता हेतु योजना निर्माण, क्षमता निर्माण, फील्ड स्तर पर समन्वय एवं मॉनिटरिंग को सदृढ़ करना होगा जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक समय पर सेवा पहुँच सके। जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार एवं कार्यक्रम लीड दुर्गा प्रसाद और रोहित कुमार के नेतृत्व में टीम ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इस पहल को प्रभावी रूप से लागू किया।कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ.अखिलेश कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ.रामकिशोर सिंह, डीपीएम स्वास्थ्य असित रंजन, बीएचएम मो.सदरूद्दिन, बीसीएम कृष्णनंदन, पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार, कार्यक्रम लीड रोहित कुमार, दुर्गा प्रसाद, प्रशिक्षित GNM मनमोहन व्यास सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। जिला जनसम्पर्क अधिकारी कमल सिंह नें बताया की स्वास्थ्य विभाग द्वारा केवल सेवा ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह पहल न केवल मातृ एनीमिया की रोकथाम की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि आने वाले समय में राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से यह उम्मीद की जा रही है कि बिहार में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने एवं सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय प्रगति होगी।





