एलपीजी समस्या के समाधान को लेकर सरकार के नये निर्देश, व्यावसायिक उपभोक्ताओं को राहत की पहल

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २६ मार्च
तेल एवं प्राकृतिक गैस की आपूर्ति से उत्पन्न समस्याओं के बीच आम जनजीवन पर पड़ रहे प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विशेष रूप से एलपीजी की उपलब्धता और उसके संतुलित वितरण को लेकर केंद्र एवं राज्य स्तर पर समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में व्यावसायिक उपभोक्ताओं होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, औद्योगिक कैंटीन एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को राहत देने के उद्देश्य से नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विदित हो की इस बाबत पूर्व में जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा अनुरोध किया गया था कि जिले के अंतर्गत संचालित होटलों एवं अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सूची तैयार कर उन्हें व्यावसायिक कोटे के तहत एलपीजी की कुल उपलब्ध मात्रा का 20 प्रतिशत तक आवंटन सुनिश्चित किया जाए। इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य उद्देश्य यह था कि आवश्यक सेवाओं से जुड़े इन प्रतिष्ठानों का संचालन बाधित न हो और आम लोगों को भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। इस दिशा में अब पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा व्यापक निर्णय लेते हुए राज्य को अतिरिक्त आवंटन प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय ने न केवल पूर्व निर्धारित 20 प्रतिशत व्यावसायिक एलपीजी आवंटन को जारी रखा है, बल्कि “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” सुधारों के तहत पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) के विस्तार के लिए अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन की भी व्यवस्था की है। इसके साथ ही वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कुल आवंटन को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की अनुमति दी गई है। सरकार द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यह अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन प्राथमिकता के आधार पर उन संस्थानों को दिया जाएगा जो सीधे आम जनता की आवश्यकताओं से जुड़े हैं। इनमें रेस्टोरेंट, ढाबा, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, डेयरी उद्योग, राज्य सरकार अथवा स्थानीय निकायों द्वारा संचालित अनुदानित भोजनालय, सामुदायिक रसोई तथा प्रवासी मजदूरों के लिए संचालित भोजन केंद्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ऐसे केंद्रों को 5 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर (एलटीएफ) उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि छोटे स्तर पर संचालित इकाइयों को भी सुविधा मिल सके। सरकार ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि आवंटन प्रक्रिया में किसी प्रकार का विचलन न हो और निर्धारित प्राथमिकता के अनुसार ही वितरण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए तेल विपणन कंपनियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी व्यावसायिक एवं औद्योगिक एलपीजी उपभोक्ताओं का अनिवार्य रूप से पंजीकरण करें। पंजीकरण के दौरान प्रत्येक उपभोक्ता का विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी वार्षिक एलपीजी आवश्यकता का स्पष्ट उल्लेख होगा। इस डेटाबेस के आधार पर तेल कंपनियां 50 प्रतिशत तक के आवंटित कोटे का सुव्यवस्थित वितरण कर सकेंगी। इससे अनियमितता पर रोक लगेगी और वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, यह व्यवस्था भविष्य में आपूर्ति प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी। इसके अलावा सरकार ने व्यावसायिक उपभोक्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। सभी औद्योगिक एवं व्यावसायिक एलपीजी उपभोक्ताओं को अपने-अपने शहरों में कार्यरत शहरी गैस वितरण (सीजीडी) इकाइयों के पास पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना अनिवार्य किया गया है। उन्हें ऐसे सभी आवश्यक कदम उठाने होंगे, जिससे वे व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध 50 प्रतिशत पीएनजी आवंटन के पात्र बन सकें। पीएनजी को एलपीजी के विकल्प के रूप में बढ़ावा देने के पीछे सरकार का उद्देश्य गैस आपूर्ति को अधिक स्थिर, सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाना है। इससे एलपीजी पर निर्भरता भी कम होगी और आपूर्ति संकट की स्थिति में बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा। जिला पदाधिकारी श्री सेन ने इस संबंध में संबंधित तेल कंपनियों के नोडल पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है साथ ही, जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी एवं पश्चिमी तथा जिला आपूर्ति पदाधिकारी को उक्त आदेश का अनुपालन प्रभावी एवं पारदर्शी रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। जिला जनसम्पर्क अधिकारी प्रमोद कुमार नें बताया की सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम न केवल वर्तमान गैस आपूर्ति संकट से निपटने में सहायक होंगे, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से ऊर्जा प्रबंधन को भी सुदृढ़ बनाएंगे। इससे आम जनता को राहत मिलने के साथ-साथ व्यावसायिक गतिविधियों में भी निरंतरता बनी रहेगी।




