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भूमि मामलों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करें : गिरिवर दयाल सिंह, आयुक्त

सीओ और एसएचओ नियमित करें भूमि विवाद के मामलों की संयुक्त सुनवाई एवं समाधान, म्यूटेशन व परिमार्जन प्लस में तेजी लाने के निर्देश, फार्मर रजिस्ट्री अभियान को दें गति

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, १४ फ़रवरी

प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने भूमि से जुड़े मामलों के त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। वे तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के अपर समाहर्ता (राजस्व) एवं भूमि सुधार उप-समाहर्ता (डीसीएलआर) की समीक्षात्मक बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में आयुक्त के सचिव संदीप प्रियदर्शी सहित प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक आयुक्त कार्यालय में आयोजित की गई, जिसमें राजस्व प्रशासन से संबंधित विभिन्न योजनाओं एवं अभियानों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि भूमि से जुड़े मामलों में अनावश्यक विलंब आमजन के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनता है। इसलिए म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), परिमार्जन प्लस (डिजिटाइज्ड जमाबंदी), अभियान बसेरा, भूमि मापी एवं लंबित जमाबंदी जैसे मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने ही भूमि संबंधी कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है। बैठक में आयुक्त ने सभी एडीएम (राजस्व) एवं डीसीएलआर को निर्देश दिया कि वे प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को अपने-अपने कार्यालय कक्ष में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर जन संवाद करें तथा आम लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान करें। उन्होंने कहा कि इससे न केवल मामलों का त्वरित निष्पादन होगा, बल्कि प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत होगा साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक शनिवार को अंचल स्तर पर भूमि विवाद से संबंधित मामलों की संयुक्त सुनवाई थानाध्यक्ष एवं अंचल अधिकारी द्वारा की जाए। यह सुनवाई विधिसम्मत तरीके से हो तथा मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए, ताकि भूमि विवाद के कारण किसी प्रकार की विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। आयुक्त ने यह भी कहा कि एडीएम एवं डीसीएलआर नियमित रूप से कोर्ट करें और लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाएं। बैठक के दौरान विशेष अभियान के तहत संचालित फार्मर रजिस्ट्री कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। आयुक्त ने निर्देश दिया कि फार्मर रजिस्ट्री के अंतर्गत अधिक से अधिक किसानों का निबंधन कराया जाए, ताकि उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। इसके लिए प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर कर्मियों की तैनाती कर नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। जिलावार प्रगति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि मुजफ्फरपुर जिले में ऑनलाइन म्यूटेशन के 98.16 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया गया है, जो सराहनीय है। परिमार्जन प्लस (डिजिटाइज्ड जमाबंदी) के 88.57 प्रतिशत तथा लेफ्ट आउट जमाबंदी के 88.16 प्रतिशत मामलों का भी निष्पादन किया जा चुका है। आयुक्त ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश दिया। पूर्वी चंपारण जिले में दाखिल-खारिज के 85.36 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया गया है।  परिमार्जन (डिजिटाइज्ड जमाबंदी) एवं भूमि मापी के मामलों में आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तेजी लाने का निर्देश दिया। पश्चिमी चंपारण जिले में म्यूटेशन के 88.93 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया गया है। वहीं परिमार्जन प्लस (डिजिटाइज्ड जमाबंदी) के 56.41 प्रतिशत तथा लेफ्ट आउट जमाबंदी के 87.20 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया गया है। आयुक्त ने परिमार्जन प्लस पर विशेष ध्यान देने और  मिशन मोड में कार्य करने को कहा। वैशाली जिले में म्यूटेशन के 74.76 प्रतिशत मामलों का निष्पादन हुआ है, जिस पर आयुक्त ने  लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश दिया। वहीं सीतामढ़ी जिले में म्यूटेशन के 87.56 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया गया है। आयुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे लंबित मामलों की दैनिक समीक्षा करें, कार्यों की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करें तथा तकनीकी एवं प्रशासनिक बाधाओं को तत्काल दूर करें। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन की कार्यकुशलता का सीधा प्रभाव आमजन के जीवन पर पड़ता है, इसलिए सभी अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता, पारदर्शिता एवं संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। बैठक में आयुक्त के सचिव संदीप प्रियदर्शी सहित प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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