विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग तथा प्रो.सोहन राज लक्ष्मी देवी तातेर जैन चेयर एवं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “मानसिक स्वास्थ्य और मन की शुद्धि” विषयक कार्यशाला आयोजित
मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाएँ संगठित योजनाएँ हैं, जो समझ को बढ़ाती हैं, तनाव से निपटने के तरीके विकसित करती हैं और सामान्य भावनात्मक लचीलेपन को बढ़ावा देती हैं- प्रो.दिनेश चंद्र राय, कुलपति

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ०६ फ़रवरी
बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग, प्रो.सोहन राज लक्ष्मी देवी तातेर जैन चेयर, जोधपुर एवं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के संयुक्त तत्वावधान में “मानसिक स्वास्थ्य और मन की शुद्धि” विषयक एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता एमबीबीएस, एमडी, मनोविज्ञान विभाग दुमका, झारखंड डॉ.पीयूष रंजन ने कहा कि सकारात्मक विचारों का प्रबंधन ही राजयोग मेडिटेशन है। इस ध्यान पद्धति से मन को शांत करने, मानसिक तनाव और अवसाद को कम करने में काफी मदद मिलती है। यह आध्यात्मिक अभ्यास नकारात्मक विचारों को दूर कर जीवन में सकारात्मकता लाता है। यह स्वयं को जानने और आंतरिक शक्तियों को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। नियमित अभ्यास से मन एकाग्र होता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि उन्हें मोबाइल और सोशल मीडिया से एक हद तक दूरी बनानी चाहिए। ऐसा करने से एकाग्रता और प्रोडक्टिविटी में सुधार होगा और कार्य में उत्पादकता बढ़ेगी। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.दिनेश चंद्र राय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाएँ संगठित योजनाएँ हैं जो समझ को बढ़ाती हैं, तनाव से निपटने के तरीके विकसित करती हैं और सामान्य भावनात्मक लचीलेपन को बढ़ावा देती हैं । ये केवल सैद्धांतिक नहीं हैं, बल्कि विभिन्न परिस्थितियों में तनाव से निपटने, मानसिक तनाव से बचने और खुशहाली बढ़ाने के लिए व्यावहारिक तकनीकें भी प्रदान करती हैं। प्रो.राय नें कहा की ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पूरे विश्व में मेंटल हेल्थ पर कार्य कर रहा है। राजयोग ध्यान के माध्यम से स्व-परिवर्तन से विश्व परिवर्तन का संदेश दिया जा रहा है। हम सबों को भारतीय ज्ञान परंपरा और वसुधैव कुटुंबकम की भावना को फैलाने का कार्य करना चाहिए। उन्होंने मनोविज्ञान विभाग को इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। कार्यशाला में बीके सीता बहन ने राजयोग मेडिटेशन और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया। मेंटल हेल्थ विशेषज्ञ बीके संजय कुमार ने कहा वर्तमान समय में स्क्रीन टाइम युवाओं के मन और शरीर दोनों के लिए खतरनाक है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौरा आ गया है, इस पर अत्यधिक निर्भरता युवाओं के विकास और भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राजयोग ध्यान से सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान संभव है। विषय प्रवेश कराते हुए विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.रजनीश कुमार गुप्ता ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों के सर्वांगीण विकास, एकेडमिक प्रदर्शन में सुधार और तनाव जैसी समस्याओं के शीघ्र निवारण के लिए आवश्यक उपाय बताना है। यह कार्यशाला समग्र शारीरिक- मानसिक स्वास्थ्य, उत्पादकता, स्वस्थ रिश्ते और जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। मंच संचालन डॉ.सुनीता कुमारी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ.आभा रानी सिन्हा ने किया। कार्यशाला में एमआईटी के प्राचार्य डॉ.मिथिलेश झा, डॉ.फनीश चंद्र, समाजसेवी एच.एल गुप्ता, सीता, रेणु, बी.एल लाहौरी, राजेंद्र प्रसाद चौरसिया, रंजना झा, मनोविज्ञान विभाग के डॉ.विकास कुमार, डॉ.किरण कुमारी, डॉ.ऋतू कुमारी, डॉ.ललित किशोर व गुंजा कुमारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।







