धान अधिप्राप्ति से लेकर औद्योगिक विकास तक योजनाओं की हुई गहन समीक्षा, कमजोर प्रखंडों पर जिलाधिकारी सख्त
किसानों, राजस्व और विकास योजनाओं में लापरवाही पर डीएम का कड़ा रुख, समयबद्ध निष्पादन के निर्देश

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २८ जनवरी
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने मुजफ्फरपुर समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में धान अधिप्राप्ति, राजस्व मामलों, भूमि सुधार, औद्योगिक क्षेत्र स्थापना तथा विभिन्न विकास योजनाओं की प्रखंडवार एवं विभागवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में सभी प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी (बीसीओ), अनुमंडल पदाधिकारी, राजस्व एवं तकनीकी विभागों के वरीय अधिकारी उपस्थित थे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर किसानों और आम जनता तक पहुंचना चाहिए, इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धान अधिप्राप्ति की प्रगति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में अब तक कुल 7812 किसानों से 51,480.81 मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की जा चुकी है। इसके साथ ही 7451 किसानों को भुगतान भी किया जा चुका है। अब तक 2175 मीट्रिक टन सीएमआर (चावल मिल्ड राइस) की आपूर्ति भी हो चुकी है। जिले में कुल 307 पैक्स/समितियां क्रियाशील हैं, जिनके माध्यम से अधिप्राप्ति कार्य संचालित किया जा रहा है। हालांकि कुछ प्रखंडों में अपेक्षित गति नहीं रहने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। सकरा, मुसहरी, सरैया, बंदरा एवं मीनापुर के प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को अधिक सक्रिय एवं तत्पर होकर कार्य करने तथा अधिप्राप्ति में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और धान खरीद की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ समयबद्ध रूप से पूरी की जाए। जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी एवं पश्चिमी को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में धान अधिप्राप्ति की नियमित समीक्षा करें और जहां भी कमियां नजर आएं, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि अनुमंडल स्तर की सक्रियता से ही प्रखंडों में कार्यों की गति तेज होगी। किसानों के निबंधन की समीक्षा में बताया गया कि जिले में अब तक 1,54,697 किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। हालांकि बंदरा, मुरौल, कटरा, मुसहरी, साहेबगंज एवं कांटी प्रखंडों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया। जिलाधिकारी ने इन सभी प्रखंडों को अगले एक सप्ताह में कम से कम 50 प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निबंधन की धीमी गति का सीधा असर अधिप्राप्ति और भुगतान प्रक्रिया पर पड़ता है, इसलिए इसमें तेजी लाना अनिवार्य है। बैठक में परिमार्जन प्लस डिजिटाइज्ड जमाबंदी की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि जिले का कुल प्रतिशत 93.07 प्रतिशत है, जबकि लेफ्ट आउट जमाबंदी में 89.32 प्रतिशत उपलब्धि हासिल हुई है। जिलाधिकारी ने इस प्रगति को और बेहतर करने का निर्देश दिया साथ ही सैरात बंदोबस्ती एवं भू-लगान संग्रह में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया गया। इस संबंध में अपर समाहर्ता राजस्व को निर्देश दिया गया कि वे हर दो दिन में समीक्षा कर संबंधित अंचलों में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करें। म्यूटेशन के एक्सपायर्ड आवेदनों की समीक्षा में मुसहरी, सकरा, कुढ़नी, कांटी, कटरा एवं साहेबगंज अंचलों में लंबित मामलों पर चिंता जताई गई। जिलाधिकारी ने इन अंचलों को जल्द से जल्द सुधार लाने का निर्देश दिया। वहीं भूमिहीन गरीब परिवारों को पर्चा वितरण के मामले में बोचहा अंचल का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ पाया गया। जानकारी दी गई कि यहां अब तक 78 पर्चा का वितरण किया जा चुका है, जबकि 116 पर्चा बनकर तैयार हैं, जिन्हें शीघ्र ही वितरित कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने अन्य अंचलों को भी बोचहा मॉडल से सीख लेने की सलाह दी। इस अवसर पर प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) की भी बैठक आयोजित की गई। बैठक में तकनीकी विभागों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं में आ रही बाधाओं की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर समस्याओं का शीघ्र समाधान करें, ताकि विकास योजनाएं तय समय-सीमा में पूरी हो सकें। जिले में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से पारू अंचल अंतर्गत पांच मौजा में 700 एकड़ भूमि अर्जन की कार्रवाई की जा रही है। इसके अंतर्गत चांदपुर चिउटाहा में 250 एकड़, चतुरपट्टी में 150 एकड़, मौजा भोजपट्टी में 95 एकड़, हरपुर कपरफोरा में 120 एकड़, विशुनपुर सरैया में 85 एकड़ भूमि अर्जनाधीन है। इस परियोजना के लिए एसआईए (सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट) का कार्य जारी है। वहीं मोतीपुर–बरूराज पथ के लिए भी एसआईए हेतु अधिसूचना निर्गत कर दी गई है। जिलाधिकारी ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बैठक में जगन्नाथ मिश्रा कॉलेज के पास बूढ़ी गंडक नदी पर पहुंच पथ सहित आरसीसी पुल निर्माण (फेज-2) की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि दस दिनों के भीतर पंचाट तैयार कर लिया जाए और कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए। बागमती परियोजना के तहत पूर्व में 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि चुनाव के बाद 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया है। हालांकि बागमती फेज-दो के अंतर्गत राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है, जिस पर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। गोबरसही आरओबी के लिए धारा 11(1) का प्रकाशन हो चुका है। वहीं मानिकपुर–अदलबड़ी खंड में आज कैंप का आयोजन कर कैंप मोड में भुगतान की कार्रवाई की गई। जानकारी दी गई कि इस परियोजना में कुल 24 करोड़ रुपये में से 15 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कार्य में शिथिलता, लापरवाही या उदासीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे फील्ड में सक्रिय रहकर योजनाओं की वास्तविक प्रगति सुनिश्चित करें और सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों, गरीबों एवं आम जनता को समय पर लाभ पहुंचाएं।





