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पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण पर डीएम की बड़ी पहल, ज्ञान भारतम् मिशन को बनाया जन-अभियान, हजारों साल की विरासत को बचाने की मुहिम

ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य भारत की समृद्ध, प्राचीन हस्तलिखित धरोहर (पांडुलिपियों) का सर्वेक्षण, संरक्षण, और AI तकनीक की मदद से डिजिटलीकरण करना है- सुब्रत कुमार सेन, जिलाधिकारी

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ०९ अप्रैल

प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित और सुलभ बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सरकार के निर्देशों के आलोक में आयोजित की गई, जिसमें पांडुलिपियों के संरक्षण, सूचीकरण और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यह मिशन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का एक राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों और सांस्कृतिक संगठनों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि ज्ञान भारतम् मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण करना है। इस मिशन के तहत कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र, कपड़े या अन्य माध्यमों पर लिखी गई ऐतिहासिक पांडुलिपियों को चिह्नित कर वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा। इन पांडुलिपियों में वेद, पुराण, आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, दर्शन, साहित्य और अन्य विषयों से संबंधित अमूल्य ज्ञान समाहित है। मिशन का उद्देश्य इस ज्ञान को न केवल संरक्षित करना, बल्कि डिजिटल माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाना भी है। जिलाधिकारी ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा विश्व में अद्वितीय रही है। हजारों वर्षों से संचित यह ज्ञान आज भी मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रासंगिक है। लेकिन समय के साथ इन पांडुलिपियों का क्षरण हो रहा है, जिससे यह अमूल्य धरोहर नष्ट होने के कगार पर है। उन्होंने कहा कि इस मिशन के माध्यम से प्राचीन ज्ञान को संरक्षित किया जा सकेगा,शोध और शिक्षा को नई दिशा मिलेगी, भारतीय संस्कृति और इतिहास को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगा तथा युवाओं को अपनी विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और संरक्षण के लिए जिला स्तर पर गठित विशेष टीम को मिशन मोड में कार्य करने का निर्देश दिया। इस टीम में शिक्षा विभाग, कला एवं संस्कृति विभाग, पुस्तकालयाध्यक्ष, इतिहासकार, संस्कृत शिक्षक, संग्रहालय प्रतिनिधि, एनएसएस स्वयंसेवक और अन्य संबंधित कर्मियों को शामिल किया गया है साथ ही इस विषय में गहरी अभिरुचि रखने वाले व्यक्ति अथवा संस्था जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के मोबाइल नंबर 7091172375 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा समाहरणालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आवश्यक जानकारी अथवा पांडुलिपि हस्तगत कर सकते हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, निजी संग्रहकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान के लिए व्यापक सर्वेक्षण अभियान चलाया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक संस्था या व्यक्ति से संपर्क कर पांडुलिपियों की सूची तैयार की जाए, जिसमें पांडुलिपि का नाम, विषय, भाषा, संरक्षक का नाम, मोबाइल नंबर और अनुमानित संख्या का स्पष्ट उल्लेख हो। सर्वेक्षण के बाद प्राप्त पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से सूचीकरण किया जाय। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक पांडुलिपि की फोटो, विवरण और स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाए, ताकि आगे के संरक्षण कार्य में सुविधा हो। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी विभाग निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करें और किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। सरकार  द्वारा द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार ही सभी कार्य किए जाएंगे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी SOP का गहन अध्ययन करें और उसी के अनुरूप कार्य योजना तैयार करें। जिलाधिकारी ने कहा कि इस मिशन को सफल बनाने के लिए आम लोगों की भागीदारी जरूरी है। इसके लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए, जिससे लोग अपने पास रखी पांडुलिपियों की जानकारी साझा करें। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, जीविका दीदियों और स्वयंसेवी संगठनों को इस अभियान से जोड़ने का निर्देश दिया। कार्य की प्रगति की निगरानी के लिए जिलाधिकारी ने साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्देश उप विकास आयुक्त को दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सप्ताह प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान किया जाए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि इस मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रखंडवार एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जाए, जो नीचले स्तर तक संपर्क  एवं समन्वय स्थापित करेगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों को इस अभियान से जोड़ा जाय। छात्रों को सर्वेक्षण, डेटा संग्रह और जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल किया जाय, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को आगाह  करते हुए कहा कि यह एक समयबद्ध और महत्वपूर्ण कार्य है, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और मिशन को सफल बनाने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन केवल पांडुलिपियों के संरक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने का अभियान है। उन्होंने सभी अधिकारियों से इस मिशन को जन आंदोलन के रूप में लेने की अपील की। जिला जनसम्पर्क अधिकारी प्रमोद कुमार नें बताया की इस पहल से न केवल जिले में छिपी अमूल्य पांडुलिपियों की पहचान होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक विशाल भंडार भी सुरक्षित किया जा सकेगा।

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