निजी विद्यालयों द्वारा यूनिफॉर्म व पुस्तक खरीद में मनमानी पर सख्ती, कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा दर निर्धारित करने का प्रमंडलीय आयुक्त का सख्त निर्देश

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ०७ अप्रैल
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं अभिभावकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा बच्चों और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ये बातें तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने आयुक्त कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुये कही। उन्होंने निजी विद्यालयों द्वारा छात्रों के अभिभावकों पर विशेष दुकानों से ही यूनिफॉर्म एवं पाठ्यपुस्तकें खरीदने के लिए बनाये जा रहे दबाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार का कृत्य न केवल अनुचित है, बल्कि पूर्णतः अव्यवहारिक एवं नियमों के विरुद्ध भी है। आयुक्त ने बताया कि उन्हें लगातार ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि कुछ निजी विद्यालय अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही उच्च मूल्य पर यूनिफॉर्म एवं किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता एवं नैतिकता के विपरीत हैं और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस संदर्भ में उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) सहित राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी विद्यालय को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है। सभी अभिभावकों को यह स्वतंत्रता है कि वे अपनी सुविधा एवं सामर्थ्य के अनुसार किसी भी दुकान से यूनिफॉर्म एवं पुस्तकें क्रय कर सकें। आयुक्त ने बताया कि इस समस्या के प्रभावी नियंत्रण एवं निगरानी के लिए उनके स्तर से प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किये जा रहे हैं। इसके तहत प्रत्येक जिले में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा, जो जिला शिक्षा पदाधिकारी के पर्यवेक्षण में कार्य करेगा। इस कंट्रोल रूम के माध्यम से अभिभावक अपनी शिकायतें एवं सुझाव सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे, जिससे त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, आयुक्त ने जिला पदाधिकारियों को यह भी सुझाव दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में एक समिति का गठन करें, जो छात्रों के यूनिफॉर्म एवं पुस्तकों के लिए तर्कसंगत एवं व्यवहारिक दर निर्धारित करेगी। इससे मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता आएगी तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक भार से राहत मिलेगी। मीडिया से बातचीत के दौरान आयुक्त ने अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी विद्यालय द्वारा इस प्रकार का दबाव बनाया जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है और यदि इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है और बच्चों तथा अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।




