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चमकी बुखार पर सख्त प्रहार: मुजफ्फरपुर की 373 पंचायतों में संध्या चौपाल की हुई शुरुआत, जीरो डेथ लक्ष्य के साथ प्रशासन अलर्ट: हर शनिवार गांव-गांव गूंजेगा चमकी बुखार बचाव संदेश

जिलाधिकारी ने मुसहरी प्रखंड के मनिका बिशनपुर चांद पंचायत में आयोजित संध्या चौपाल में भाग लेकर आम नागरिकों को जागरुक करते हुए आवश्यक एहतियाती उपायों का पालन करने का किया आह्वान

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ०४ अप्रैल

गर्मी के मौसम के आगमन के साथ ही मुजफ्फरपुर जिले में चमकी बुखार (एईएस) को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। इसी कड़ी में पूरे जिले में चमकी बुखार की रोकथाम एवं बचाव हेतु व्यापक जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया। जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा जिले के सभी 373 पंचायतों में जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक के अधिकारियों की पंचायतवार तैनाती की गई है तथा प्रत्येक शनिवार को संध्या चौपाल आयोजित करने का आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत जिले के सभी पंचायतों में प्रतिनियुक्त अधिकारियों द्वारा चौपाल लगाकर लोगों को जागरूक किया गया। इस अभियान का मुख्य कार्यक्रम मुसहरी प्रखंड के मनिका बिशनपुर चांद स्थित उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित किया गया, जहां जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में जीविका दीदी, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, विकास मित्र, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत जिला पदाधिकारी श्री सेन एवं उप-विकास आयुक्त श्रेष्ठ अनुपम, सिविल सर्जन डॉ.सुधीर कुमार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। सभा को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता और सजगता से कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चमकी बुखार जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए प्रशासनिक तत्परता के साथ-साथ जनसहभागिता भी बेहद जरूरी है। जिलाधिकारी ने आमजन, विशेषकर अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि किसी भी बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी देरी के उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में पहुंचाएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मी मौजूद हैं, जिन्हें इस बीमारी के उपचार की पूरी जानकारी दी गई है। साथ ही अस्पतालों में सभी आवश्यक दवाएं, ग्लूकोज एवं चिकित्सा संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। जिलाधिकारी ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को समय पर भोजन देना, पर्याप्त पानी पिलाना और धूप से बचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि वे पूरी सक्रियता के साथ कार्य करें और विगत वर्ष की तरह इस वर्ष भी “जीरो डेथ” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए संकल्पित रहें। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कुपोषित बच्चों के परिजनों को जीविका द्वारा तैयार फूड बास्केट भेंट की। जिला पदाधिकारी ने आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका एवं जीविका दीदियों को निर्देश दिया कि वे घर-घर जाकर 0 से 15 वर्ष तक के बच्चों की वार्डवार सूची तैयार करें और उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करें। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और निगरानी से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों को कभी भी खाली पेट नहीं सोने दें और उन्हें संतुलित एवं पौष्टिक आहार अवश्य दें। जिलाधिकारी ने कहा कि इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए पंचायत स्तर पर संध्या चौपाल, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर, बैनर एवं हैंडबिल के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाएगी। साथ ही गांव-गांव में माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को यह समझाना बेहद जरूरी है कि बच्चों का नियमित भोजन और स्वास्थ्य देखभाल ही इस बीमारी से बचाव का सबसे कारगर उपाय है। डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी तय कर दी गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। संदिग्ध मरीजों की पहचान, त्वरित इलाज एवं आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। जिलाधिकारी ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि चमकी बुखार को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूकता और सतर्कता से इस बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर स्तर पर तैयार है, लेकिन आम जनता का सहयोग इस अभियान की सफलता के लिए बेहद जरूरी है। उप-विकास आयुक्त श्रेष्ठ अनुपम नें कहा की चमकी बुखार मुख्यतः बच्चों (0-15 वर्ष) में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो अत्यधिक गर्मी, कुपोषण, खाली पेट सोने और शरीर में ग्लूकोज की कमी के कारण होती है। इसके अतिरिक्त तेज धूप में अधिक समय तक रहने, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) तथा अस्वच्छ खान-पान भी इसके प्रमुख कारण हैं। चमकी बुखार के प्रमुख लक्षण तेज बुखार, शरीर में ऐंठन या झटके (चमकी आना), बेहोशी या अत्यधिक सुस्ती, बार-बार उल्टी होना, पसीना आना एवं कमजोरी, सुबह के समय अचानक स्थिति बिगड़ना है. इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना अनिवार्य है। सिविल सर्जन डॉ.सुधीर कुमार नें बताया की चमकी बुखार से बचाव पूरी तरह संभव है, यदि कुछ सरल सावधानियों का पालन किया जाए। इसके  लिए बच्चों को रात में बिना खाना खाए न सुलाएं, गर्मी में पर्याप्त मात्रा में पानी एवं तरल पदार्थ दें, दोपहर की तेज धूप में बच्चों को बाहर जाने से रोकें, हल्का, सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन दें और घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखें। सिविल सर्जन ने बताया कि लक्षण दिखते ही तत्काल प्राथमिक कदम उठाना जरूरी है. जिसमें बच्चे के बेहोश होने पर उसे बाईं करवट लिटाएं, तेज बुखार होने पर शरीर को ठंडे पानी से पोंछें, तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाएं और 102 या 108 एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करें. उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाएं, उपकरण एवं चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध है। जिला जनसम्पर्क अधिकारी प्रमोद कुमार नें बताया की चमकी बुखार एक गंभीर लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है। समय पर पहचान, सही इलाज, संतुलित आहार और आवश्यक सावधानियों का पालन कर बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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