जिलाधिकारी के निर्देश के अनुसार श्रम अधीक्षक द्वारा गठित धावा दल नें बाल श्रमिकों की विमुक्ति हेतु विभिन्न दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में चलाया सघन जांच अभियान

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २४ मार्च
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के निर्देश के अनुसार श्रम अधीक्षक अजय कुमार के द्वारा गठित धावा दल बाल श्रमिकों की विमुक्ति हेतु मुजफ्फरपुर नगर निगम एवं मुजफ्फरपुर सदर अनुमंडल क्षेत्र मुशहरी और सरैया प्रखंड अंतर्गत विभिन्न दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में धावा दल की टीम के द्वारा सघन जांच अभियान चलाया गया। धावा दल टीम के संयोजक श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मुसहरी पूजा कुमारी एवं श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सरैया शशांक शेखर थे। सदस्यों में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी कुढ़नी प्रकाश कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सूर्यकांत कुमार मीनापुर, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी डॉ.रश्मि राज मुरौल, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बोचहा रंजीत मिश्रा, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बंदरा तान्या श्री, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी कटरा संजय कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी गायघाट मो.अली, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी औराई अवंत कुमार एवं थाना सरैया तथा अहियापुर के पुलिसकर्मी शामिल थे। जांच के क्रम में मुशहरी प्रखंड के जीरो माइल चौक स्थित बिहार जलपान से 03 बाल श्रमिक, गुड्डू होटल से 01 बाल श्रमिक और सहनी भोजनालय से 01 बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया। सरैया प्रखंड के सरैया बाजार से निर्मल चाट दुकान से 01 बाल श्रमिक, दिव्यांशी रेडिमेड से 01 बाल श्रमिक और न्यू वैशाली स्वीट्स से 01 बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया। विमुक्त सभी 08 बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति, मुजफ्फरपुर के समक्ष उपस्थापित कर निर्देशानुसार उन्हें बाल गृह में रखा गया है। बाल एवं किशोर श्रम ( प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम1986 के तहत नियोजक के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। श्रम अधीक्षक श्री कुमार ने बताया कि बाल श्रमिकों से किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान में कार्य कराना बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत गैरकानूनी है तथा बाल श्रमिकों से कार्य कराने वाले व्यक्तियों को ₹20000 से ₹50000 तक का जुर्माना और 2 वर्षों तक के कारावास का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा एम.सी मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार 1996 में दिए गए आदेश के आलोक में नियोजकों से ₹20000 प्रति बाल श्रमिक की दर से अलग से राशि की वसूली की जाएगी जो जिलाधिकारी के पदनाम से संधारित जिला बाल श्रमिक पुनर्वास सह कल्याण कोष में जमा किया जाएगा। इस राशि को जमा नहीं कराने वाले नियोजक के विरुद्ध एक सर्टिफिकेट केस या नीलाम पत्र वाद अलग से दायर किया जाएगा। धावा दल टीम के द्वारा सभी दुकान एवं प्रतिष्ठान में सघन जांच की गई तथा सभी नियोजको से किसी भी बाल श्रमिक को नियोजित नहीं करने हेतु एक शपथ पत्र भरवाया गया।





