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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर लोक शिक्षा समिति द्वारा चार दिवसीय प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन आयोजित

शिक्षा और शिक्षक राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी और सशक्त माध्यम- प्रो.दिनेश चन्द्र राय, कुलपति

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, ११ फ़रवरी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर लोक शिक्षा समिति, बिहार द्वारा संचालित विद्यालयों के प्रधानाचार्य के कौशल विकास तथा हितधारकों के समग्र एवं सर्वांगीण विकास की दृष्टि से भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में चार दिवसीय प्रधानाचार्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन का शुभारंभ “पाँच परिवर्तन” विषय पर आधारित भव्य एवं प्रेरणादायी झांकी के समक्ष सामूहिक दीप प्रज्वलन के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। झांकी में प्रदर्शित पाँचों उद्देश्यों के समक्ष लोक शिक्षा समिति के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.दिनेश चंद्र राय, लोक शिक्षा समिति के महामंत्री एवं शिक्षाविद् डॉ.कृष्णवीर सिंह शाक्य तथा क्षेत्रीय क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम ने चार दिवसीय सम्मेलन का दीप प्रज्वलित कर औपचारिक शुरुआत की। लोक शिक्षा समिति के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने 11-14 फ़रवरी तक आयोजित होने वाले चार दिवसीय सम्मेलन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इन चार दिनों में इस विषय पर गहन मंथन किया जाएगा कि सरस्वती विद्या मंदिर एवं सरस्वती शिशु मंदिर से निकलने वाले भैया-बहन किस प्रकार राष्ट्र, समाज और देश को व्यवस्थित, सशक्त एवं संस्कारित बनाने में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। कुलपति प्रो.दिनेश चन्द्र राय ने संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित चार दिवसीय प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में शिक्षा, सेवा भाव और राष्ट्रभक्ति के समन्वय पर विशेष जोर दिया। डॉ.राय ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा और शिक्षक राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी और सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सरस्वती विद्या मंदिर का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र, संस्कार एवं सेवा भाव का निर्माण करना है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक हम अपनी गंगा और अपने गाँव को सुदृढ़ नहीं करेंगे, तब तक भारतीय संस्कारों को मजबूत करना संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने प्रधानाचार्य की भूमिका को केवल प्रशासनिक न मानते हुए उसे एक आस्था बताया, जो समाज को सही दिशा देने का कार्य करती है। इसके पश्चात लोक शिक्षा समिति के महामंत्री द्वारा अध्यक्षीय उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। लोक शिक्षा समिति के महामंत्री एवं शिक्षाविद् डॉ. कृष्णवीर सिंह शाक्य ने अपने उद्बोधन में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक की केंद्रीय भूमिका तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर सारगर्भित एवं प्रेरणादायी विचार रखे, जिन्हें उपस्थित सभी प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने गंभीरता से आत्मसात किया। क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम ने संगठन, अनुशासन, संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण पर अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षण संस्थान समाज की रीढ़ हैं और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला यहीं से रखी जाती है। संपूर्ण सम्मेलन का वातावरण अनुशासन, राष्ट्रभक्ति एवं शैक्षिक चिंतन से परिपूर्ण रहा। कार्यक्रम के समापन अवसर पर भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के सचिव डॉ.ललित किशोर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि यह सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक चिंतन एवं संकल्प का सशक्त मंच है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि सम्मेलन में प्राप्त विचारों, मार्गदर्शन एवं प्रेरणाओं को अपने-अपने शिक्षण संस्थानों में व्यवहारिक रूप से लागू करें, जिससे संस्कारवान, चरित्रवान एवं राष्ट्रभक्त नागरिकों का निर्माण संभव हो सके। अंत में उन्होंने सभी की उपस्थिति और सहयोग के लिए पुनः धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आज के इस सत्र के विधिवत समापन की घोषणा की। इस अवसर पर डॉ.रजनीश कुमार गुप्ता, डॉ.विनोद बैठा, डॉ.अंकज कुमार, डॉ.सौरभ सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं प्रधानाचार्य उपस्थित रहे.

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