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भूकंप आपदा मॉक ड्रिल का हुआ सफल आयोजन, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का हुआ परीक्षण

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २६ फ़रवरी

मुजफ्फरपुर जिले में संभावित भूकंप आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से 26 फरवरी को व्यापक आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। पूर्वाह्न 8:00 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक चले इस सघन अभ्यास में विभिन्न विभागों और एजेंसियों ने समन्वित रूप से भाग लिया तथा आपदा प्रबंधन की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का व्यावहारिक परीक्षण किया गया। यह मॉक ड्रिल बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित की गई जिसका लाइव स्ट्रीमिंग की गई । प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों सीआईएसएफ और सीआरपीएफ के अधिकारियों को प्रेक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था, जिन्होंने निर्धारित मानकों के अनुसार पूरे अभ्यास की निगरानी की। संबंधित प्रेक्षक अपनी विस्तृत रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपेंगे, जिसके आधार पर भविष्य की रणनीतियों को और सुदृढ़ किया जाएगा। अभ्यास में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन दल, होमगार्ड, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मियों ने भाग लिया। सभी ने आपदा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अपने-अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन किया। मॉक ड्रिल के सफल संचालन के लिए सिकंदरपुर स्टेडियम में स्टेजिंग एरिया बनाया गया था। यहां पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित मानव बल, राहत एवं बचाव सामग्री, आपातकालीन उपकरण, एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन तथा अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई थी। जैसे ही किसी सिमुलेशन स्थल से भूकंप की सूचना प्राप्त हुई, संबंधित टीमें स्टेजिंग एरिया से आवश्यक संसाधनों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुईं। इस दौरान प्रतिक्रिया समय, संसाधन प्रबंधन और समन्वय की वास्तविक स्थिति में जांच की गई। शहरी क्षेत्र में पांच प्रमुख स्थलों को सिमुलेशन साइट के रूप में चिन्हित किया गया था, जिसमें समाहरणालय परिसर, सदर अस्पताल, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड प्लांट, राधा देवी प्लस टू उच्च विद्यालय एवं मजिस्ट्रेट कॉलोनी, जूरन छपरा शामिल था. समाहरणालय परिसर में भूकंप की काल्पनिक सूचना मिलते ही पूरी टीम घटनास्थल पर पहुंची और मलबे में फंसे लोगों को निकालने, प्राथमिक उपचार देने, आग लगने की स्थिति में नियंत्रण, घायलों को अस्पताल पहुंचाने तथा क्षेत्र को सुरक्षित करने का अभ्यास किया गया। घायलों को प्राथमिक उपचार देने से लेकर अस्पताल में  घायलों के पहुंचाने की स्थिति का पूर्वाभ्यास किया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आपदा के समय स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों। मॉक ड्रिल में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) शैलेश कुमार चौधरी ने इंसिडेंट कमांडर के रूप में पूरे अभियान का नेतृत्व किया। इंसिडेंट कमांड सिस्टम के तहत विभिन्न अधिकारियों को स्पष्ट दायित्व सौंपे गए थे, जिससे आदेश और सूचना का प्रवाह व्यवस्थित बना रहा। पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई थी तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु रखा गया। संचार तंत्र की कार्यक्षमता, वायरलेस एवं मोबाइल नेटवर्क के उपयोग, नियंत्रण कक्ष की सक्रियता तथा विभागीय समन्वय का भी परीक्षण किया गया। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं अचानक आती हैं और व्यापक जन-धन हानि का कारण बन सकती हैं। ऐसे में मॉक ड्रिल का महत्व अत्यंत बढ़ जाता है। मॉक ड्रिल से यह स्पष्ट होता है कि किसी वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रशासन कितनी तेजी से प्रतिक्रिया दे सकता है। अभ्यास के दौरान संसाधनों, संचार या समन्वय में जो भी कमी सामने आती है, उसे समय रहते दूर किया जा सकता है। विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ता है और संयुक्त रूप से कार्य करने की क्षमता विकसित होती है। जब विद्यालयों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर मॉक ड्रिल होती है तो आम नागरिकों में भी आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ती है। पूर्वाभ्यास के कारण वास्तविक आपदा के समय अफरातफरी कम होती है और लोग व्यवस्थित ढंग से निर्देशों का पालन करते हैं। मॉक ड्रिल के माध्यम से जिले की आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने में कई लाभ प्राप्त होते हैं, जिसमें त्वरित निर्णय क्षमता में वृद्धि, संसाधनों की उपलब्धता और उपयोग का परीक्षण, आपातकालीन सेवाओं की तत्परता का मूल्यांकन, प्रतिक्रिया समय में कमी एवं जीवन एवं संपत्ति की क्षति को न्यूनतम करने की तैयारी शामिल है. जिला जनसम्पर्क अधिकारी प्रमोद कुमार नें बताया कि जिला प्रशासन भूकंप जैसी संभावित आपदाओं से निपटने के लिए सजग, सक्रिय और तैयार है। समन्वित प्रयास, स्पष्ट नेतृत्व और प्रशिक्षित टीमों की मौजूदगी से यह भरोसा मजबूत हुआ कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

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