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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में “अंतर सांस्कृतिक दक्षता” पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

सांस्कृतिक विविधता सामूहिक शक्ति का पर्याय है, जिससे समस्त मानवता को लाभ मिलता है: प्रो.मार्टा मिलानी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेरोना, इटली

ध्रुव कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर, बिहार, २३ सितम्बर

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में “अंतर सांस्कृतिक दक्षता” पर विश्वविद्यालय अतिथिशाला में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेरोना, इटली की प्रो.मार्टा मिलानी ने शिक्षकों एवं छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अंतर सांस्कृतिक दक्षता सामाजिक एवं मानवीय समरसता हेतु एक मूल्यवान संपत्ति है। अंतर सांस्कृतिक क्षमता विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ने और उनके साथ बातचीत करने की कला है। इसमें ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण का संयोजन शामिल होता है। यह सांस्कृतिक मतभेदों को समझने, सांस्कृतिक अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवहार करने और विविध समाजों में शांति और सहिष्णुता को बढ़ावा देने में मदद करता है। इसके साथ ही यह दूसरों के दृष्टिकोण को समझने, सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक और प्रभावी संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानव के अंदर सांस्कृतिक भिन्नताओं को स्वीकार करते हुए लचीलापन और सहानुभूति की भावना विकसित होती है। उन्होंने अंतर सांस्कृतिक क्षमता के प्रमुख तत्व ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण, प्रभावी संचार, सांस्कृतिक संवेदनशीलता, शांति, लचीलापन और अनुकूलन पर विस्तार से बताया। अंतर्राष्ट्रीय वर्कशॉप का उद्घाटन करते हुए कुलपति डॉ.दिनेश चंद्र राय ने कहा कि इटली से आयीं प्रो.मार्टा मिलानी की उपस्थिति व सहभागिता से मनोविज्ञान विभाग के साथ-साथ विश्वविद्यालय को एक ग्लोबल एकेडमिक पहचान मिली है। इसके लिए प्रो.रजनीश कुमार गुप्ता समेत विभाग के सभी प्रतिभाशाली शिक्षक एवं छात्र धन्यवाद के पात्र हैं। विभागाध्यक्ष डॉ.रजनीश कुमार गुप्ता ने प्रो.मार्टा मिलानी को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारी तेजी से जुड़ती और वैश्वीकृत होती दुनिया में, अंतर्सांस्कृतिक दक्षता का महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह मूलतः विभिन्न संस्कृतियों के बीच प्रभावी ढंग से संवाद करने और विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों के साथ काम करने की क्षमता है। यह अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप शैक्षिक जगत में मील का पत्थर साबित होगा। इस वर्कशॉप से  शिक्षकों एवं छात्रों में अंतर सांस्कृतिक दक्षता को समझने और विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ है। अंतर सांस्कृतिक दक्षता विषय पर आयोजित कार्यशाला में छात्रों ने विभिन्न सांस्कृतिक समूह से बातचीत करने, सांस्कृतिक पूर्वाग्रहों को पहचानने, सहयोगात्मक कार्य और सीखने की अपनी क्षमता को बढ़ाने का अवसर प्राप्त किया है। प्रो मार्टा मिलानी मिलानी ने छात्रों के जिज्ञासा को अच्छी तरह अपने तर्कपूर्ण जवाबों से शांत किया। कार्यशाला में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.आभा रानी सिन्हा, डॉ. विकास कुमार, कार्यक्रम समन्वयक डॉ.तूलिका सिंह, डॉ, सुनीता कुमारी समेत बड़ी संख्या में शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

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